राज्य की भर्ती व्यवस्था पर तीखा सवाल, बाहरी नेतृत्व को लेकर सियासी घमासान

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नौकरियों का मुद्दा फिर गरमाया, भर्ती आयोग की भूमिका पर उठे सवाल

हरियाणा के भिवानी में राजनीतिक बयानबाजी उस समय तेज हो गई जब कांग्रेस के प्रदेश स्तर के एक वरिष्ठ प्रवक्ता ने राज्य की भर्ती प्रणाली और उसके नेतृत्व को लेकर कड़ा हमला बोला। उन्होंने हरियाणा लोक सेवा आयोग के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश के युवाओं के साथ अन्याय हो रहा है और सरकारी नौकरियों का बड़ा हिस्सा राज्य से बाहर के लोगों को मिल रहा है। इस पूरे मामले पर उन्होंने मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से जवाब देने की मांग की है।

कांग्रेस नेता का कहना है कि भर्ती से जुड़ी संस्थाओं का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को अवसर देना होता है, लेकिन वर्तमान स्थिति इसके ठीक उलट नजर आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में सरकारी पदों पर बाहरी उम्मीदवारों की नियुक्ति हुई है, जिससे हरियाणा के पढ़े-लिखे युवाओं में निराशा और आक्रोश बढ़ रहा है। उनका दावा है कि कुछ भर्तियों में यह आंकड़ा बेहद चिंताजनक स्तर तक पहुंच चुका है।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब प्रदेश में प्रशासनिक और शैक्षणिक रूप से सक्षम लोग मौजूद हैं, तो फिर शीर्ष पदों पर बाहरी राज्यों से नियुक्ति क्यों की जा रही है। उनका कहना है कि इससे न केवल स्थानीय प्रतिभा की अनदेखी होती है, बल्कि भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने इसे संघीय ढांचे और क्षेत्रीय संतुलन के खिलाफ बताया।

कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सरकार रोजगार के मुद्दे पर केवल दावे कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवा लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अवसर नहीं मिल पा रहे। इस स्थिति के लिए उन्होंने सीधे तौर पर राज्य सरकार और भर्ती आयोग की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।

इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार और संबंधित आयोग इस आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। रोजगार और भर्ती का मुद्दा हरियाणा की राजनीति में पहले से ही संवेदनशील रहा है और आने वाले समय में यह बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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