वायरल ऑडियो और स्क्रीनशॉट से उठा निगरानी तंत्र पर संदेह, प्रशासन ने जांच के दिए संकेत
हरियाणा के नारनौल में सरकारी वाहनों की निगरानी व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुपों पर कुछ ऑडियो क्लिप और स्क्रीनशॉट वायरल होने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इन वायरल सामग्रियों में आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ समूहों के जरिए ओवरलोड वाहनों को समय रहते सूचना देकर सुरक्षित रास्तों से निकालने में मदद की जाती है।
बताया जा रहा है कि इन व्हाट्सएप ग्रुपों में सड़क जांच, नाकों की स्थिति और सरकारी वाहनों की मूवमेंट से जुड़ी जानकारियां साझा की जाती थीं। वायरल ऑडियो में कथित तौर पर यह चर्चा सुनाई देती है कि किस समय किस रास्ते से भारी वाहन निकाले जाएं, ताकि कार्रवाई से बचा जा सके। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन मामला सामने आने के बाद प्रशासन इसे गंभीरता से ले रहा है।
जिला प्रशासन के अनुसार, यदि सरकारी संसाधनों या कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आती है, तो इसे नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। ओवरलोड वाहन न केवल कानून के खिलाफ हैं, बल्कि सड़क सुरक्षा और सार्वजनिक ढांचे के लिए भी बड़ा खतरा पैदा करते हैं। ऐसे में किसी भी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस पूरे मामले पर उपायुक्त (डीसी) ने स्पष्ट कहा है कि वायरल ऑडियो और स्क्रीनशॉट की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी वाहनों और कर्मचारियों की भूमिका की गहन पड़ताल की जाएगी, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
वहीं, इस प्रकरण के बाद आम लोगों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि ओवरलोडिंग की वजह से सड़कें खराब होती हैं और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है। ऐसे में यदि निगरानी व्यवस्था पर ही सवाल उठने लगें, तो यह चिंता का विषय है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जांच निष्पक्ष होगी और किसी को भी बचाया नहीं जाएगा।
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