घटिया सामग्री के आरोपों के बीच गौसेवकों का प्रदर्शन, डीसी से की निष्पक्ष जांच की मांग
रोहतक में एक गौशाला में शेड निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। निर्माण कार्य में कथित तौर पर घटिया सामग्री के इस्तेमाल के आरोप लगाते हुए गौशाला ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों और गौसेवकों ने प्रदर्शन किया और जिला उपायुक्त (डीसी) से मुलाकात कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो गौवंश की सुरक्षा और सरकारी धन दोनों को नुकसान होगा।
गौशाला ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे विभागीय अधिकारियों, विशेषकर एसडीओ और जेई की मिलीभगत से मानकों की अनदेखी की जा रही है। उनका कहना है कि शेड निर्माण में घटिया सीमेंट, कमजोर लोहे की सरिया और निम्न गुणवत्ता की अन्य सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिससे भविष्य में शेड के गिरने का खतरा बना रह सकता है। यह न केवल गौवंश के लिए खतरनाक है, बल्कि जनहित से जुड़े इस प्रोजेक्ट की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है।
प्रदर्शनकारियों ने डीसी को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि निर्माण सामग्री के सैंपल तुरंत भरवाए जाएं और उन्हें लैब में जांच के लिए भेजा जाए। साथ ही, जब तक जांच पूरी न हो जाए, तब तक निर्माण कार्य पर रोक लगाने की भी मांग की गई। ट्रस्ट पदाधिकारियों का कहना है कि वे विकास कार्यों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
डीसी से मुलाकात के दौरान गौसेवकों ने यह भी कहा कि गौशालाएं केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि आस्था और सेवा का केंद्र होती हैं। ऐसे में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया कि शिकायत की गंभीरता से जांच की जाएगी और यदि मानकों के विपरीत कार्य पाया गया तो उचित कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल इस मुद्दे ने रोहतक में स्थानीय स्तर पर चर्चा और असंतोष को और बढ़ा दिया है।
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