यमुना नदी के जल बंटवारे को लेकर हरियाणा और राजस्थान के बीच चल रहे विवाद और मांगों पर अब दिल्ली में बड़ी बैठक आयोजित की जा रही है। इस बैठक में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री हिस्सा लेंगे, जबकि केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री मध्यस्थता करेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में पानी की उपलब्धता, वितरण और भविष्य की जरूरतों को लेकर विस्तृत चर्चा होगी।
सूत्रों के अनुसार राजस्थान लंबे समय से यमुना के पानी में अपने हिस्से की मांग को लेकर केंद्र और हरियाणा सरकार के समक्ष मुद्दा उठाता रहा है। वहीं हरियाणा का कहना है कि राज्य पहले से ही सीमित जल संसाधनों के दबाव का सामना कर रहा है। ऐसे में पानी के बंटवारे को लेकर संतुलित समाधान निकालना जरूरी है।
बैठक में सिंचाई, पेयजल और कृषि जरूरतों को ध्यान में रखते हुए संभावित समझौते पर चर्चा की जा सकती है। अधिकारियों का मानना है कि यदि दोनों राज्यों के बीच सहमति बनती है तो इससे भविष्य में जल संकट को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही कई लंबित परियोजनाओं को भी गति मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का कहना है कि हरियाणा और राजस्थान दोनों ही राज्यों में गर्मियों के दौरान पानी की मांग तेजी से बढ़ जाती है। ऐसे में यमुना के पानी का प्रभावी प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। केंद्र सरकार भी इस मामले में आपसी सहमति से समाधान निकालने के पक्ष में दिखाई दे रही है।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह बैठक अहम मानी जा रही है, क्योंकि जल संसाधनों का मुद्दा दोनों राज्यों में लंबे समय से संवेदनशील रहा है। अब सभी की नजरें इस बैठक के नतीजों पर टिकी हुई हैं।
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