“संसदीय जंग: Vande Mataram बहस पर अमित शाह के तेवर ने विपक्ष को भड़काया”

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Amit Shah speech

शाह ने ‘वन्दे मातरम’ बहस का बचाव किया; कांग्रेस नेताओं ने इसे राजनीति विखंडन और लोकतंत्र का तमाशा करार दिया

संसद में चली Vande Mataram पर बहस के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि यह चर्चा राष्ट्रवादी चेतना और देश के सांस्कृतिक मर्म की बात है और इसे चुनावी कारणों से जोड़नेवाले लोग गलत सोच रहे हैं। शाह ने बहस का बचाव करते हुए बताया कि Vande Mataram ‘मनत्र’ की तरह था जिसने देश में सांस्कृतिक राष्ट्रीयता को जगा दिया — और उन्होंने उस दावे का भी खंडन किया कि यह बहस सिर्फ पश्चिम बंगाल चुनाव के मद्देनजर बुलायी गई।

शाह ने विपक्ष पर तीखा हमला भी बोला — कहा गया कि कुछ नेताओं ने बहस के उद्देश्य पर सवाल उठाकर उसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश की। उन्होंने यह भी उठाया कि संवेदनशील राष्ट्रीय विषयों पर गलत आरोप लगाकर ध्यान भटकाने की कोशिश हो रही है। इन टिप्पणियों के बाद लोकसभा/राज्यसभा में सियासी हंगामा शुरू हो गया।

कांग्रेस और उससे जुड़े नेताओं ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। विपक्षी नेताओं—जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ—ने शाह के रुख को ‘डिस्ट्रैक्शन‘ और लोकतंत्र का ‘तमाशा’ बनाने की कोशिश कहा। कुछ नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार गंभीर समस्या-ग्रस्त मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए यह बहस करा रही है; इसलिए बहस और शाह की भाषा पर तीखी नाराजगी व्यक्त की गयी।

कुल मिलाकर यह टकराव दो पहलुओं पर केंद्रित रहा: (1) क्या Vande Mataram पर यह बहस इतिहास-संवेदी और सार्थक है, और (2) क्या इसे चुनावी राजनीति के लिए समयबद्ध किया गया। अमित शाह ने बहस की आवश्यकता की बात दोहरायी; विपक्ष ने इसे राजनीति करार दे कर संसद में बवाल मचा दिया — और यही वजह है कि प्रचंड प्रतिरोधी प्रतिक्रियाएँ, जैसे कि ‘लोकतंत्र को तमाशा बनाया जा रहा है’, सामने आईं

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