सैकड़ों वीरों ने लड़ी आज़ादी की जंग, मगर सरकारी रिकॉर्ड में उनका नाम नहीं
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में हरियाणा के सैकड़ों वीरों ने आजाद हिंद फौज के रूप में अंग्रेजों के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी। इन जांबाजों ने अपने प्राणों की आहुति दी और स्वतंत्रता आंदोलन में अहम योगदान दिया, लेकिन आज भी इनमें से कई शहीदों की पहचान सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। उनकी शहादत की कहानी अक्सर इतिहास की फाइलों में दफन नजर आती है।
इतिहासकारों के अनुसार, आजाद हिंद फौज के हरियाणा के ये शहीद अलग-अलग रेजिमेंट्स में शामिल होकर विदेशी सत्ता के खिलाफ मोर्चा संभालते रहे। इनमें युवा पुरुषों ने न केवल सैनिक क्षमता दिखाई, बल्कि अपने साहस और बलिदान से आज़ादी की भावना को जन-जन तक पहुँचाया। बावजूद इसके, स्वतंत्रता पश्चात उनके नाम और उपलब्धियों को उचित मान्यता नहीं मिली।
स्थानीय इतिहासकारों का कहना है कि उस समय के दस्तावेज और फाइलों में शहीदों के रिकॉर्ड पर्याप्त नहीं थे। कई मामलों में उनके योगदान का जिक्र तो है, लेकिन व्यक्तिगत पहचान और स्थान नहीं मिल पाई। नतीजतन, आज भी उनके नाम गुमनाम हैं, जबकि उनका बलिदान और त्याग हर स्वतंत्रता सेनानी की तरह सम्मान का पात्र है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि प्रशासन और इतिहासकार मिलकर हरियाणा के इन आजाद हिंद फौज शहीदों के नाम और योगदान को संकलित करें और उन्हें स्मारक, किताबों और डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से सार्वजनिक किया जाए। इससे न केवल उनके बलिदान की स्मृति जिंदा रहेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी उनके संघर्ष और साहस से प्रेरणा मिलेगी।
स्थानीय समाजसेवी और स्वतंत्रता संग्राम शोधकर्ता इस दिशा में पहल कर चुके हैं। उनका कहना है कि शहीदों की पहचान और सम्मान के लिए सरकारी और निजी संस्थानों को मिलकर काम करना होगा। हरियाणा के ये वीर आज भी अपने बलिदान के बावजूद गुमनाम हैं, लेकिन उनका साहस और देशभक्ति हमेशा याद की जानी चाहिए।
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