शिमला/नई दिल्ली: भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) की बिजली हिस्सेदारी को लेकर दशकों से चल रहे विवाद में हिमाचल प्रदेश को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने 6 नवंबर 2026 को अपने फैसले में पंजाब और हरियाणा को हिमाचल प्रदेश को बिजली का बकाया हिस्सा देने का निर्देश दिया है। इस फैसले से हिमाचल को अगले 20 वर्षों तक बिजली मिलेगी और राज्य को इससे आर्थिक लाभ होने की उम्मीद है।
20 साल तक हर साल मिलेगी 653 मिलियन यूनिट बिजली
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि पंजाब और हरियाणा मिलकर हिमाचल प्रदेश को कुल 11,973 मिलियन यूनिट बिजली की बकाया आपूर्ति करेंगे। यह बिजली अगले 20 वर्षों तक अक्टूबर से मार्च के कम मांग वाले महीनों में दी जाएगी। अदालत ने इसके लिए सालाना 653 मिलियन यूनिट आपूर्ति का निर्देश दिया है
AG बोले- सालाना 600 से 800 करोड़ रुपये तक का आर्थिक लाभ
हिमाचल प्रदेश के महाधिवक्ता (AG) अनूप कुमार रतन ने शिमला में बताया कि यदि बिजली का औसत मूल्य 10 रुपये प्रति यूनिट माना जाए तो राज्य को सालाना करीब 600 से 800 करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ हो सकता है। उनके अनुसार, 20 वर्षों में कुल लाभ लगभग 15 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यह अनुमान बिजली की बिक्री दर पर निर्भर करेगा।
420.77 करोड़ रुपये की देनदारी बिजली से होगी समायोजित
सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश की परियोजनाओं की पूंजीगत लागत में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी की देनदारी 420.77 करोड़ रुपये निर्धारित की है। इसमें पंजाब के हिस्से की देनदारी 249.23 करोड़ और हरियाणा की 171.55 करोड़ रुपये है। इस राशि को बिजली के बकाया हिस्से से समायोजित किया जाएगा। इसके बाद हिमाचल को 11,973 मिलियन यूनिट बिजली मिलनी है।
दशकों पुराने विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया विराम
भाखड़ा-नांगल और ब्यास परियोजनाओं में हिमाचल की बिजली हिस्सेदारी का विवाद लंबे समय से अदालत में चल रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में ही हिमाचल की 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी को मान्यता दे दी थी, लेकिन बिजली की वास्तविक मात्रा और बकाया देनदारी के समायोजन पर विवाद जारी था। 6 नवंबर 2026 के फैसले से इस विवाद के निपटारे का रास्ता साफ हो गया है।
इस फैसले के बाद हिमाचल प्रदेश को लंबे समय से लंबित बिजली का हिस्सा मिलने का रास्ता खुला है। वहीं पंजाब और हरियाणा को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार निर्धारित अनुपात में बिजली की आपूर्ति करनी होगी।
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