चंडीगढ़ के व्यस्त ट्रिब्यून चौक पर प्रस्तावित फ्लाईओवर परियोजना को बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने इस परियोजना पर रोक लगाते हुए कहा है कि किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य शहर के स्वीकृत मास्टर प्लान के विपरीत नहीं किया जा सकता। अदालत की इस टिप्पणी के बाद परियोजना के भविष्य को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शहरी विकास योजनाओं और मास्टर प्लान के महत्व पर जोर दिया। अदालत का मानना है कि शहर के दीर्घकालिक विकास और यातायात प्रबंधन के लिए तैयार की गई योजनाओं की अनदेखी नहीं की जा सकती। यदि कोई परियोजना निर्धारित मानकों और मास्टर प्लान से मेल नहीं खाती, तो उसे लागू करने से पहले आवश्यक कानूनी और तकनीकी प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।
हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को ट्रैफिक समस्या के समाधान के लिए अन्य विकल्पों पर भी विचार करने का सुझाव दिया है। विशेष रूप से अंडरपास निर्माण को एक संभावित विकल्प के रूप में देखने की बात कही गई है। अदालत का मानना है कि इससे यातायात व्यवस्था में सुधार किया जा सकता है और मास्टर प्लान से जुड़े विवादों से भी बचा जा सकता है।
ट्रिब्यून चौक शहर के प्रमुख यातायात केंद्रों में से एक माना जाता है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं। लंबे समय से यहां ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए विभिन्न योजनाओं पर चर्चा होती रही है। फ्लाईओवर परियोजना को भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था।
फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद परियोजना पर आगे की कार्रवाई कानूनी और तकनीकी समीक्षा के बाद ही संभव होगी। अब संबंधित विभागों को अदालत के निर्देशों के अनुरूप वैकल्पिक समाधान तलाशने होंगे ताकि यातायात समस्या का स्थायी और नियमानुसार समाधान निकाला जा सके।
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