चंडीगढ़ में एक नाबालिग लड़की की मौत के बाद परिवार ने गंभीर सवाल उठाते हुए पुलिस से FIR दर्ज करने की मांग की है। पिता का आरोप है कि उनकी बेटी का सूर्या नाम के एक युवक से संपर्क था। परिवार के मुताबिक अस्पताल में इलाज के दौरान भी नाबालिग बार-बार सूर्या से मिलने की बात कह रही थी। अब पिता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
परिजनों का दावा है कि सूर्या ने सोशल मीडिया पर नाबालिग के साथ अपनी तस्वीर साझा की थी। आरोप है कि फोटो के साथ उसने ‘माई वाइफ’ लिखा था। परिवार इस पोस्ट को भी जांच में शामिल करने की मांग कर रहा है।
नाबालिग की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पिता के अनुसार इलाज के दौरान वह लगातार सूर्या का नाम ले रही थी और उससे मिलवाने की बात कह रही थी।
बेटी की मौत के बाद परिवार सदमे में है। पिता का कहना है कि उन्हें पूरे घटनाक्रम की सच्चाई जानने का अधिकार है और पुलिस को मामले में FIR दर्ज कर हर पहलू की जांच करनी चाहिए।
परिवार ने युवक और नाबालिग के बीच संपर्क की प्रकृति को लेकर भी जांच की मांग की है। पुलिस मोबाइल फोन, चैट, कॉल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच कर महत्वपूर्ण जानकारी जुटा सकती है।
सोशल मीडिया पर कथित तौर पर साझा की गई तस्वीर भी जांच का अहम हिस्सा हो सकती है। पोस्ट कब किया गया, तस्वीर कहां की थी और उसके साथ ‘माई वाइफ’ लिखने के पीछे क्या संदर्भ था, इसकी पुष्टि डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर की जा सकती है।
चूंकि मृतका नाबालिग थी, इसलिए मामले में उसकी उम्र और युवक के साथ कथित संबंधों से जुड़े तथ्यों की जांच विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगी। यदि किसी तरह के अपराध के साक्ष्य सामने आते हैं तो संबंधित बाल संरक्षण और आपराधिक कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
पिता का कहना है कि उनकी बेटी की मौत की परिस्थितियां स्पष्ट होनी चाहिए। परिवार यह जानना चाहता है कि उसकी तबीयत बिगड़ने से पहले क्या हुआ था और वह अस्पताल में बार-बार युवक से मिलने की बात क्यों कर रही थी।
मामले में मेडिकल रिकॉर्ड और पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इनसे नाबालिग की मौत के वास्तविक कारण और उसकी स्वास्थ्य स्थिति से जुड़े तथ्य सामने आ सकते हैं।
पुलिस अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों के बयान भी दर्ज कर सकती है। इससे यह पुष्टि करने में मदद मिलेगी कि इलाज के दौरान नाबालिग ने क्या कहा था और उसकी हालत कैसी थी।
परिवार की शिकायत के आधार पर युवक का बयान भी लिया जा सकता है। उससे नाबालिग के साथ संपर्क, सोशल मीडिया पोस्ट और घटना से पहले हुई बातचीत के संबंध में पूछताछ की जा सकती है।
हालांकि पिता द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि अभी जांच के बाद ही होगी। किसी व्यक्ति के खिलाफ FIR की मांग या आरोप लगना अपने आप में उसके दोषी होने का प्रमाण नहीं है।
डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना इस मामले में महत्वपूर्ण होगा। नाबालिग और युवक के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और उपलब्ध संदेशों से घटनाक्रम की कई कड़ियां सामने आ सकती हैं।
पुलिस यह भी जांच सकती है कि घटना से पहले नाबालिग किसी तरह के दबाव, विवाद या परेशानी का सामना कर रही थी या नहीं। परिवार और उसके करीबी लोगों के बयान इस पहलू को समझने में मदद कर सकते हैं।
पिता ने पुलिस से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए FIR दर्ज की जाए और जांच में किसी तरह की लापरवाही न बरती जाए। परिवार का कहना है कि उन्हें बेटी की मौत से जुड़े सभी सवालों का जवाब चाहिए।
फिलहाल नाबालिग की मौत के वास्तविक कारण और सूर्या नाम के युवक की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट होगी।
चंडीगढ़ में सामने आए इस मामले में अब परिवार की शिकायत और पुलिस की अगली कार्रवाई पर नजर है। पिता FIR दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, ताकि बेटी की मौत की पूरी सच्चाई सामने आ सके।
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