पर्यावरण संरक्षण की दिशा में राज्य की पहल असर दिखा रही
चंडीगढ़/पंजाब: इस साल पंजाब में पराली जलाने के मामलों में स्पष्ट कमी देखी गई है। राज्य प्रशासन और पर्यावरण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अब तक कुल मामले 5 हजार के पार गए हैं, जो पिछले वर्षों के मुकाबले कम हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट किसानों में बढ़ती जागरूकता, सरकारी निवारक अभियानों, और पराली प्रबंधन के विकल्पों के कारण संभव हुई है।
राज्य सरकार ने किसानों को पराली का सही प्रबंधन करने, खेतों में जलाने के बजाय जैविक खाद बनाने और आधुनिक कृषि उपकरणों का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया है। इस पहल के परिणामस्वरूप कई किसानों ने पराली जलाने के बजाय उसका उपयोग खेती में सुधार के लिए करना शुरू कर दिया है।
हालांकि, पड़ोसी राज्यों में स्थिति गंभीर बनी हुई है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में इस सीज़न में पराली जलाने के मामले पंजाब से कहीं अधिक दर्ज किए गए हैं। इससे न केवल वहां की वायु गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि पड़ोसी राज्यों में भी धुंध और प्रदूषण की समस्या बढ़ रही है।
पंजाब सरकार ने चेतावनी दी है कि जो किसान कानून का उल्लंघन करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने यह भी कहा कि आगामी मौसम में पराली जलाने की घटनाओं पर विशेष नजर रखी जाएगी, ताकि राज्य की हवा स्वच्छ बनी रहे और प्रदूषण कम किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा, निगरानी और कड़े नियम मिलकर ही इस तरह के मामलों को नियंत्रित कर सकते हैं। इस समय पराली प्रबंधन के लिए सरकारी सब्सिडी और जागरूकता अभियान किसानों के लिए सहायक साबित हो रहे हैं।
पंजाब की जनता और प्रशासन दोनों इस प्रयास में एकजुट हैं। राज्य के स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण को बनाए रखने के लिए यह पहल महत्वपूर्ण कदम है।
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