सफीदों (एस• के• मित्तल) : प्राचीन शिव मंदिर कथा समिति के तत्वावधान में सफीदों शहर के दादा खेड़ा स्थित प्राचीन शिव मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कथावाचक शिवाकांत शुक्ला महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक ग्रंथ का पाठ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाला दिव्य संदेश है। इसके माध्यम से भक्ति, धर्म, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। श्रीमद्भागवत में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्तों की आस्था और धर्म की स्थापना के प्रसंगों के जरिए यह बताया गया है कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य ईश्वर से जुड़कर सद्कर्म करना है। मनुष्य को अहंकार, लोभ और मोह का त्याग कर सेवा, प्रेम और समर्पण का मार्ग अपनाना चाहिए। भागवत के अनुसार सच्ची भक्ति वही है जिसमें निष्काम भाव, दया और सभी प्राणियों के प्रति सम्मान हो। यही भाव मनुष्य को आंतरिक शांति और आत्मिक संतोष प्रदान करता है। श्रीमद्भागवत यह भी सिखाती है कि कठिन परिस्थितियों में भी धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। भक्त प्रह्लाद, ध्रुव और मीरा जैसे प्रसंग यह दर्शाते हैं कि अटूट श्रद्धा और विश्वास से हर बाधा को पार किया जा सकता है। इस मौके पर अतिथि के तौर पर पहुंचे समाजसेवी एवं शिक्षाविद् नरेश सिंह बराड़ ने कहा कि भगवान के प्रति प्रेम और मानवता की सेवा ही सच्चा धर्म है। जब मनुष्य अपने जीवन में भक्ति, दया और सत्य को अपनाता है, तब समाज में सद्भाव, शांति और नैतिक मूल्यों की स्थापना होती है। श्रीमद्भागवत केवल आध्यात्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को संस्कारित करने वाला मार्गदर्शक है, जो मानव को धर्म, प्रेम और परोपकार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
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