दयालु योजना में 35,500 फाइलें लटकीं
स्टाफ की कमी से अटका काम
हरियाणा सरकार की महत्वाकांक्षी दयालु योजना इन दिनों फाइलों के अंबार में उलझती नजर आ रही है। जानकारी के अनुसार, वर्तमान समय में करीब 35,500 फाइलें पेंडिंग हैं, जिनकी वजह से पात्र लाभार्थियों को समय पर राहत नहीं मिल पा रही। योजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मुख्यालय में स्टाफ की भारी कमी है, जिसके चलते फाइलों की गति उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ रही।
दयालु योजना, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और जरूरतमंद परिवारों को सीधी सहायता प्रदान करना है, शुरुआत में तेजी से आगे बढ़ी थी। लेकिन पिछले कुछ महीनों से फाइलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। आवेदन जांच, दस्तावेज सत्यापन और अंतिम स्वीकृति प्रक्रियाओं में देरी के कारण आवेदकों को लंबे समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ रही है।
स्थिति को देखते हुए सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब कई फाइलें, जो पहले केवल मुख्यालय स्तर पर ही क्लियर होती थीं, जिला स्तर पर ही निपटाई जाएंगी। इससे न केवल प्रक्रियाओं में तेजी आएगी, बल्कि मुख्यालय पर दबाव भी कम होगा। इसके लिए जिलों में विशेष टीमें गठित की जा रही हैं, जिन्हें प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री के पास यह विभाग होने के चलते उन्होंने स्वयं समीक्षा की है और लंबित फाइलों को समयबद्ध तरीके से निपटाने के निर्देश दिए हैं। सरकार चाहती है कि लाभार्थियों को देरी का सामना न करना पड़े और योजना अपने मूल उद्देश्य के अनुरूप काम करे।
अधिकारियों का कहना है कि जिला स्तर पर फाइलें निपटने से करीब 60–70% फाइलें तेजी से क्लियर होने की उम्मीद है। सरकार ने इस दिशा में डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम को भी मजबूत करने का फैसला किया है, ताकि फाइलों की स्थिति रीयल-टाइम में ट्रैक की जा सके।
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