दिल्ली ब्लास्ट में फरीदाबाद-मस्जिद से जुड़ा संभावित सुराग,

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Delhi blast
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इमामों से पूछताछ के बीच विदेशी और आतंकी वित्तीय कनेक्शन की जांच

दिल्ली के लाल किला कार ब्लास्ट मामले में फरीदाबाद में मस्जिदों की विशेष चेकिंग की गई है, और जांच एजेंसियों ने इमामों से भी पूछताछ की है। इस हमारी कार्रवाई का संदर्भ सुरक्षा को तीव्र करने का है, क्योंकि मस्जिद और यूनिवर्सिटी के मध्य संगठित आतंकी नेटवर्क के आरोपों की पड़ताल की जा रही है।

उसी कड़ी में, अल-फलाह यूनिवर्सिटी की ओर बड़ी जांच तेज हो गई है: यूनिवर्सिटी के 15 डॉक्टर अभी तक “गायब” बताए जा रहे हैं। पुलिस और जांच एजेंसियां उनकी लोकेशन और संपर्कों का पता लगाने में जुटी हैं।

जांच में यह भी सामने आया है कि विश्वविद्यालय में बड़े पैमाने पर हथियार और विस्फोटक रखने का आरोप है।    आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, ED (एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट) ने अब विश्वविद्यालय के वित्तीय रिकॉर्ड की जटिल जांच के लिए हस्तक्षेप कर दिया है, जिससे मनी-ट्रेल की तह तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

पुलिस तथा NIA की टीमों ने यूनिवर्सिटी परिसर समेत आसपास के इलाके में गहन छानबीन की है। कुछ मेडिकल स्टाफ और स्टूडेंट्स से पूछताछ की जा रही है, और यह जांच हो रही है कि क्या यह ब्लास्ट “व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल” का हिस्सा था।

अल-फलाह यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अपने बयान में कहा है कि इन डॉक्टरों का यूनिवर्सिटी से संबंध सिर्फ उनकी “ऑपचारिक ड्यूटी” तक सीमित है।  इसके बावजूद, संस्थान के रिकॉर्डों का फॉरेंसिक ऑडिट कराने का आदेश जारी किया गया है।

यह मामला न सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से गंभीर है, बल्कि शिक्षा जगत की प्रतिष्ठा और विश्वास पर भी प्रश्न उठाता है। जांच एजेंसियां कह रही हैं कि अगर पैसे, सक्रियता और जाल का मनी-नेटवर्क साबित हुआ, तो यह किसी एक ब्लास्ट से कहीं बड़ा आतंकवादी नेटवर्क हो सकता है।

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