नोटबंदी के बैन हुए नोटों का दुरुपयोग — 2016 के 500/1000 के नोटों से चलाया गया वित्तीय जाल,
जांच में साढ़े 3 करोड़ का लेनदेन सामने
नोटबंदी के बाद निषिद्ध घोषित 500 और 1000 रुपये के नोट वर्षों बाद भी अवैध नेटवर्क में सक्रिय रहे और हालिया छापेमारी में इन नोटों से जुड़े लगभग ₹3.5 करोड़ के फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ। जांच अधिकारियों के मुताबिक यह मामला साधारण जुगाड़ या पुरानी नकदी की बचत नहीं, बल्कि सुनियोजित मनी-लॉन्ड्रिंग और फर्जीवाड़े का हिस्सा है।
जांच में सामने आए प्रमुख पहलू इस प्रकार हैं: सबसे पहले रैकेट ने पुरानी करेंसी को इकठ्ठा कर कई परतों में छिपाया — कुछ नोट स्थानीय स्तर पर भंडारित थे तो कुछ कंटेनरों/वैरिहाउस में छिपा कर रखा गया था। इसके बाद नेटवर्क ने नकदी को वैध दिखाने के लिए फर्जी दस्तावेज, नकली रसीदें और शेल कंपनियों का सहारा लिया। दूसरा रास्ता हवाला-सिस्टम और नकद-लोन कॉलम के जरिए पैसा एक जगह से दूसरी जगह भेजना रहा, जिससे स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो गया।
अधिकारियों ने बताया कि रैकेट ने पुराने नोटों को बदलवाने, हवाला के माध्यम से अंतरराज्यीय ट्रांसफर और कभी-कभी घरेलू मार्केट में नकली मार्केटिंग के जरिए घूमाया। कुछ मामलों में नकली व्यापारिक बिल बनाकर बैंकिंग चैनल में भी पैसा क्लीन करने की कोशिश हुई। प्रारंभिक रेड में गोदामों, वाहनों और कुछ व्यक्तिगत तिजोरियों से बड़ी मात्रा में पुरानी करेंसी और संबंधित दस्तावेज़ बरामद हुए हैं।
पुलिस/जांच संस्थाएँ अभी मल्टी-एजेंसी टीम के साथ ट्रांसपोर्ट रूट, लेनदेन के बैंक अकाउंट और शटर-कंटैक्ट व्यक्तियों की पैठ का पता लगा रही हैं। कहा जा रहा है कि रैकेट के कर्णधार आम तौर पर स्थानीय एजेंट और कुछ थोक खरीदार होते हैं, जिन्हें पकड़ना जांच की प्राथमिकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नोटबंदी के नोटों से जुड़ा यह प्रकार का अपराध पुराने स्टॉक्स, कमजोर सत्यापन और आर्थिक नीतियों की खामियों का लाभ उठाकर किया गया। जांच जारी है और आगे के खुलासों में और गिरफ्तारी होने की संभावना जताई जा रही है।
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