दुकान से फिरा सस्ता जाल: थैले में छिपाकर बिकती विदेशी शराब, अब बड़े बाजारों तक पहुंची

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foreign alcohol smuggling

₹10 करोड़ के अवैध विदेशी शराब नेटवर्क का पर्दाफाश:

जूते की दुकान से शुरू हुआ कारोबार, अब गुरुग्राम–राजस्थान–दिल्ली तक सप्लाई

नारनौल में एक मामूली सी जूतों की दुकान से शुरू हुआ कारोबार अब एक बहु-राज्यीय अवैध शराब सप्लाई चेन बनकर सामने आया है। प्रारम्भिक जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने विदेशी ब्रांड की बोतलों को थैलों और जालियों में छिपाकर स्थानीय बाजारों में बेचना शुरू किया। समय के साथ यह कारोबार संगठित हुआ और गुरुग्राम, राजस्थान और दिल्ली के कुछ ठेकों व रिटेल प्वाइंट्स तक पहुँच गया। तरक्की के साथ ही लेन-देन के पैमाने बढ़ते गए और अब कथित तौर पर इस गिरोह की कमाई लगभग ₹10 करोड़ आंकी जा रही है।

सूत्रों ने बताया कि नेटवर्क ने कस्टम ड्यूटी और करों से बचने के लिए कई तरकीबें अपनाईं—कभी नकली लेबल लगाए गए, कभी कंटेनरों में अन्य सामानों की आड़ बनाई गई। कई बार बोतलों पर जाली क्यूआर और बारकोड लगाकर सप्लाई वैध दिखाने की कोशिश भी की गई। इस तरह की रणनीतियों ने खरीददारों और कुछ ठेकेदारों को धोखे में रखा, जबकि रैकेट को भारी मुनाफा मिला।

स्थानीय प्रशासन और एक्साइज विभाग ने हाल ही में कुछ संदिग्ध आपूर्ति चैनलों पर नजर रखनी शुरू कर दी है। छानबीन में गोदामों और वाहनों की ट्रेसिंग की जा रही है और खरीद-फरोख्त के वित्तीय रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि क्या कुछ ठेकेदार या रिटेलर जानबूझकर इस अवैध सप्लाई से जुड़े थे या वे भी शिकार बने हुए थे।

विशेषज्ञों का कहना है कि महंगी ब्रांडेड शराब पर भारी कस्टम व एक्साइज दरें तस्करी को बढ़ावा देती हैं। इसलिए नीति रूपी चुनौतियाँ और तकनीकी निगरानी—जैसे टैम्पर-प्रूफ लेबल, क्यूआर सत्यापन और सप्लाई-चेन ऑडिट—जरूरी हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और अवैध स्टॉक को जब्त कर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

 

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