आवारा पशु प्रबंधन के लिए गठित ज्वाइंट टास्क फोर्स की प्रगति की होगी समीक्षा
फतेहाबाद जिले में बेसहारा और आवारा पशुओं की समस्या को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। उपायुक्त (डीसी) ने इस मुद्दे के समाधान के लिए गठित ज्वाइंट टास्क फोर्स से अब तक की गई कार्रवाई और प्रगति की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। प्रशासन का उद्देश्य यह जानना है कि विभिन्न विभागों द्वारा तय जिम्मेदारियों का कितनी गंभीरता से पालन किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, आवारा पशुओं के कारण सड़क हादसों, फसलों के नुकसान और शहरी क्षेत्रों में अव्यवस्था की लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं। इसी को देखते हुए जिला स्तर पर ज्वाइंट टास्क फोर्स का गठन किया गया था, जिसमें नगर परिषद, पशुपालन विभाग, पुलिस प्रशासन, पंचायत विभाग और संबंधित अन्य संस्थानों को शामिल किया गया।
डीसी के निर्देशों के तहत प्रत्येक विभाग और संस्थान में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाना था, जो बेसहारा पशुओं की धरपकड़, गौशालाओं में भेजने, देखभाल और रिकॉर्ड संधारण की जिम्मेदारी संभाले। अब डीसी ने स्पष्ट किया है कि जिन संस्थानों ने अब तक नोडल अधिकारी नियुक्त नहीं किए हैं या कार्य में लापरवाही बरती है, उनसे जवाबदेही तय की जाएगी।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट के माध्यम से यह आकलन किया जाएगा कि कितने पशुओं को अब तक पकड़ा गया, उन्हें कहां शिफ्ट किया गया और गौशालाओं की वर्तमान स्थिति क्या है। इसके साथ ही भविष्य की कार्ययोजना पर भी मंथन किया जाएगा, ताकि समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके।
डीसी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यह मुद्दा केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम दिखाई देने चाहिए। उन्होंने कहा कि आम जनता की सुरक्षा और किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
प्रशासन का मानना है कि विभागों के बीच बेहतर समन्वय से ही बेसहारा पशुओं की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
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