विकास योजना को लेकर बयानबाजी तेज, पंचायत स्तर पर अनियमितताओं का लगाया आरोप
पंजाब में एक सरकारी योजना के विरोध में लाए गए प्रस्ताव को लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इस कदम को जनता को भ्रमित करने वाला करार देते हुए विपक्ष पर सीधा हमला बोला। मुख्यमंत्री का कहना है कि जिस योजना पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वह ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन से जुड़ी है, लेकिन राजनीतिक कारणों से इसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रस्ताव लाने वालों का मकसद न तो पारदर्शिता है और न ही जनता का हित। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जिन लोगों की पंचायतों में खुद बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियां सामने आई हैं, वे अब दूसरों पर सवाल उठा रहे हैं। उनके अनुसार, संबंधित क्षेत्रों में पंचायत स्तर पर 10 हजार से ज्यादा अनियमितताओं के मामले उजागर हो चुके हैं, जिन पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि विकास योजनाओं को राजनीति का हथियार बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने दावा किया कि हरियाणा में लागू की गई व्यवस्था से गांवों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं और लोगों को सीधे लाभ मिला है। इसी वजह से कुछ राजनीतिक दल असहज महसूस कर रहे हैं और बेबुनियाद आरोपों का सहारा ले रहे हैं।
इस बयान के बाद दोनों राज्यों की राजनीति में बयानबाजी और तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने तथ्यों के साथ अपनी बात रखी है, जबकि विरोधी दल आरोपों को निराधार बता रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंचायत और ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दे आने वाले समय में बड़े राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि जनता अब सब समझती है और विकास के नाम पर किए जा रहे कामों का मूल्यांकन खुद करेगी। उन्होंने भरोसा जताया कि सच्चाई सामने आने पर भ्रम फैलाने की कोशिशें सफल नहीं होंगी।
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