चॉइस सेंटर नहीं मिलने पर भी तबादला
चंडीगढ़:
हरियाणा सरकार द्वारा लागू की गई JBT (जूनियर बेसिक टीचर) डिस्ट्रिक्ट कैडर चेंज पॉलिसी को लेकर शिक्षकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इस पॉलिसी में ऐसी शर्तें जोड़ी गई हैं, जिन्हें शिक्षक अव्यावहारिक और अन्यायपूर्ण बता रहे हैं। सबसे बड़ा झोल यह है कि किसी जिले से दूसरे जिले में कैडर चेंज या ट्रांसफर के लिए संबंधित स्कूल या जिले में 95 प्रतिशत शिक्षकों का भरा होना जरूरी कर दिया गया है।
शिक्षकों का कहना है कि राज्य के अधिकांश सरकारी स्कूल पहले से ही स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में 95 प्रतिशत शिक्षकों की उपलब्धता की शर्त पूरी होना लगभग असंभव है। इसका सीधा असर यह होगा कि वर्षों से ट्रांसफर का इंतजार कर रहे JBT शिक्षक उसी जिले में फंसे रह जाएंगे।
पॉलिसी की एक और विवादित शर्त यह है कि अगर शिक्षक को उसकी पसंद (चॉइस) का स्कूल या सेंटर नहीं मिलता, तो भी उसका तबादला रोका जा सकता है। शिक्षकों का आरोप है कि इससे प्रशासन को मनमर्जी करने का मौका मिल जाएगा और पारदर्शिता खत्म हो जाएगी।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि कैडर चेंज पॉलिसी का उद्देश्य शिक्षकों की पारिवारिक, स्वास्थ्य और सामाजिक समस्याओं का समाधान होना चाहिए था, लेकिन नई शर्तों ने इसे और जटिल बना दिया है। कई शिक्षक ऐसे हैं जिनके परिवार दूसरे जिले में रहते हैं या जिनकी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हैं, लेकिन पॉलिसी के चलते वे आवेदन करने से भी वंचित हो सकते हैं।
शिक्षक संघों ने मांग की है कि 95 प्रतिशत की शर्त को तुरंत हटाया जाए या इसे व्यवहारिक स्तर तक कम किया जाए। साथ ही यह भी मांग की जा रही है कि यदि शिक्षक सभी मानदंड पूरे करता है तो चॉइस सेंटर न मिलने की स्थिति में भी उसे वैकल्पिक जिले या स्कूल में ट्रांसफर दिया जाए।
इस मामले को लेकर कई शिक्षक संगठन जल्द ही शिक्षा विभाग और सरकार के समक्ष ज्ञापन देने की तैयारी कर रहे हैं। यदि पॉलिसी में संशोधन नहीं किया गया तो राज्य स्तर पर आंदोलन की चेतावनी भी दी जा रही है।
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