682 टोकन जारी होने के बावजूद जमीन सौदों पर ब्रेक, करोड़ों का कारोबार अटका
हरियाणा में तहसीलदारों की हड़ताल के बीच सरकार ने जमीन रजिस्ट्री प्रक्रिया को सुचारु रखने के लिए डीआरओ और एसडीएम को विशेष अधिकार सौंपे थे, लेकिन इसके बावजूद हालात में खास सुधार देखने को नहीं मिला। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अधिकार मिलने के बाद भी प्रदेश भर में केवल 28 रजिस्ट्रियां ही हो सकीं, जबकि 682 लोगों ने जमीन की रजिस्ट्री के लिए पहले से टोकन ले रखे थे।
यह स्थिति बताती है कि वैकल्पिक व्यवस्था जमीन पर पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाई। रजिस्ट्रियों की संख्या बेहद कम रहने से आम नागरिकों के साथ-साथ रियल एस्टेट और निवेशकों में भी भारी नाराजगी देखी जा रही है। जिन लोगों ने टोकन लिया था, वे कई दिनों से तहसीलों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ पा रहा।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक जिन 28 रजिस्ट्रियों को दर्ज किया गया, उनमें करीब 4.34 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन की खरीद-फरोख्त हुई है। हालांकि यह आंकड़ा सामान्य दिनों की तुलना में बेहद कम है। आमतौर पर प्रदेश में एक ही दिन में इससे कहीं अधिक रजिस्ट्री होती हैं, जिससे राजस्व को भी अच्छा-खासा फायदा होता है।
जमीन रजिस्ट्री में देरी का सीधा असर बैंक लोन, निर्माण कार्य और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं पर भी पड़ रहा है। कई मामलों में खरीदारों और विक्रेताओं के बीच तय सौदे अधर में लटक गए हैं। इससे आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं और सरकार के राजस्व संग्रह पर भी असर पड़ रहा है।
प्रशासन का कहना है कि व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों को अतिरिक्त स्टाफ और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने पर विचार किया जा रहा है, ताकि लंबित मामलों को जल्द निपटाया जा सके। वहीं आम जनता मांग कर रही है कि या तो हड़ताल खत्म कराई जाए या फिर ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए जो वास्तव में काम कर सके।
यह मामला साफ संकेत देता है कि केवल अधिकार सौंपना काफी नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर मजबूत व्यवस्था और समन्वय भी उतना ही जरूरी है।
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