उत्तर भारत के इस राज्य में सर्दी ने बढ़ाई मुश्किलें, तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा
प्रदेश में कड़ाके की ठंड ने एक बार फिर लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर दिया है। सुबह के समय वातावरण में इतनी अधिक नमी देखी गई कि सड़कें और खुले क्षेत्र दिखाई देना मुश्किल हो गए। कई स्थानों पर हालात ऐसे बने कि वाहन चालकों को बेहद सावधानी से सफर करना पड़ा। खासतौर पर शहरी इलाकों में दुपहिया और चौपहिया वाहनों की रफ्तार काफी धीमी रही, जिससे ट्रैफिक भी प्रभावित हुआ।
दक्षिणी हिस्सों में खेतों और खुले स्थानों पर ठंड का सीधा असर नजर आया। रात के समय तापमान गिरने से पौधों, सिंचाई के लिए बिछी नलियों और खुले उपकरणों पर जमी हुई परत देखी गई। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि सब्जियों और शुरुआती फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार ऐसी स्थिति बनी रहने पर पैदावार पर असर पड़ सकता है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के कई जिलों में न्यूनतम पारा सामान्य से काफी नीचे चला गया है। कुछ क्षेत्रों में यह स्तर दो डिग्री सेल्सियस से भी कम दर्ज किया गया, जो इस मौसम की सबसे ठंडी रातों में से एक मानी जा रही है। ठंड के कारण सुबह के समय लोग घरों से निकलने में देर कर रहे हैं और बाजारों में भी चहल-पहल कम देखने को मिल रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। ठंडी हवा और नमी के कारण सर्दी, खांसी और सांस संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। प्रशासन की ओर से भी वाहन चालकों को अलर्ट किया गया है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और जरूरी हो तो फॉग लाइट का इस्तेमाल करें।
आने वाले दिनों में मौसम में थोड़ा बदलाव आने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन तब तक ठंड और नमी का असर बना रह सकता है। ऐसे में आम लोगों से अपील की गई है कि वे मौसम से जुड़ी आधिकारिक जानकारियों पर नजर रखें और सुरक्षा उपाय अपनाएं।
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