हरियाणा में मानसून ब्रेक से बढ़ी गर्मी, हिसार 38.7°C तक पहुंचा; सितंबर की शुरुआत में बदलेगा मौसम

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Haryana Weather

हरियाणा में मानसून की रफ्तार कमजोर पड़ने के कारण गर्मी और उमस एक बार फिर लोगों को परेशान कर रही है। प्रदेश में मानसूनी ब्रेक के बीच हिसार में अधिकतम तापमान 38.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इस बीच तीन जिलों में बारिश के आसार बने हुए हैं। मौसम में बड़ा बदलाव 1 सितंबर से देखने को मिल सकता है, जब प्रदेश में बारिश की गतिविधियां दोबारा बढ़ने की संभावना है।

पिछले कुछ दिनों से हरियाणा में मानसून की सक्रियता कम हुई है। लगातार बारिश का दौर थमने के बाद दिन के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

बारिश नहीं होने और धूप निकलने के कारण कई जिलों में गर्मी बढ़ गई है। वातावरण में नमी मौजूद रहने से उमस भी लोगों की परेशानी बढ़ा रही है।

हिसार में तापमान 38.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से गर्मी का असर ज्यादा महसूस किया गया। प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

हालांकि तीन जिलों में मौसम कुछ अलग रह सकता है। इन क्षेत्रों में बादल छाने के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी हुई है।

स्थानीय मौसमी परिस्थितियों के कारण कुछ स्थानों पर अचानक बूंदाबांदी या बारिश हो सकती है। बाकी जिलों में मौसम मुख्य रूप से गर्म और उमस भरा रह सकता है।

मानसून सीजन में कई बार कुछ दिनों के लिए बारिश की गतिविधियां काफी कमजोर हो जाती हैं। इस स्थिति को मानसून ब्रेक के रूप में देखा जाता है।

इस दौरान मानसून ट्रफ की स्थिति बदलने के कारण मैदानी क्षेत्रों में बारिश कम हो सकती है। परिणामस्वरूप साफ मौसम और तेज धूप के कारण तापमान बढ़ने लगता है।

अब 1 सितंबर से मौसम में बदलाव के संकेत बताए जा रहे हैं। मानसूनी गतिविधियां दोबारा सक्रिय होने पर हरियाणा के अधिक जिलों में बारिश देखने को मिल सकती है।

बारिश का नया दौर शुरू होने पर तापमान में भी गिरावट आने की संभावना रहेगी। इससे गर्मी और उमस से कुछ राहत मिल सकती है।

सितंबर की शुरुआत में होने वाली बारिश किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण होगी। खरीफ की फसलों की स्थिति के अनुसार बारिश से सिंचाई की जरूरत कम हो सकती है।

हालांकि जिन खेतों में पहले से पर्याप्त नमी है, वहां किसानों को मौसम देखकर ही सिंचाई करने की जरूरत है।

धान वाले क्षेत्रों में पानी की आवश्यकता अधिक होती है, जबकि कपास जैसी फसलों में ज्यादा नमी होने पर रोग और कीटों का खतरा बढ़ सकता है।

ऐसे में किसानों के लिए केवल प्रदेश स्तर के पूर्वानुमान के बजाय अपने जिले और ब्लॉक के मौसम अपडेट पर नजर रखना महत्वपूर्ण है।

हरियाणा में इस मानसून सीजन के दौरान बारिश का वितरण सभी जिलों में एक समान नहीं रहा है। कुछ क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई, जबकि कुछ जिलों में अपेक्षाकृत कम वर्षा दर्ज की गई है।

इसी कारण सितंबर में होने वाली बारिश कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है।

शहरी क्षेत्रों में भी मौसम के अगले बदलाव पर नजर रहेगी। पिछले दिनों गुरुग्राम और अन्य शहरों में भारी बारिश के बाद जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति सामने आई थी।

यदि सितंबर की शुरुआत में तेज बारिश होती है तो स्थानीय प्रशासन के लिए नालों और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त रखना जरूरी होगा।

फिलहाल प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में मानसूनी ब्रेक के कारण गर्मी बढ़ी हुई है। तीन जिलों में बारिश की संभावना के बीच हिसार में पारा 38.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। अब 1 सितंबर से संभावित मौसम बदलाव और मानसून की दोबारा सक्रियता पर नजर रहेगी।

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