हेल्थ बजट का 70% सैलरी में खर्च, केंद्र ने भर्ती और रेसलाइजेशन की दी सलाह
हरियाणा में स्वास्थ्य विभाग के बजट का लगभग 70% हिस्सा कर्मचारियों की सैलरी और वेतन भत्तों पर खर्च हो रहा है। केंद्र सरकार ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य को निर्देश दिया है कि स्वास्थ्य बजट में सैलरी का हिस्सा 50% तक सीमित किया जाए, ताकि शेष फंड का इस्तेमाल इंफ्रास्ट्रक्चर, मेडिकल उपकरण, दवाओं और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं में किया जा सके।
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार को केंद्र द्वारा यह सुझाव दिया गया है कि बजट में संतुलन बनाए रखने के लिए नए भर्तियों और रेसलाइजेशन (सैलरी संरचना में सुधार) की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाए। वर्तमान में सैलरी पर इतना अधिक खर्च होने के कारण नई भर्तियों और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार में बाधा आ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्वास्थ्य बजट का बड़ा हिस्सा केवल वेतन पर खर्च होता रहेगा, तो प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं, अस्पतालों की सुविधाओं और रोगियों के लिए आवश्यक संसाधनों पर असर पड़ेगा। रेसलाइजेशन और भर्ती के माध्यम से बजट को संतुलित किया जा सकता है और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे केंद्र के सुझाव के अनुरूप आवश्यक कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही सैलरी स्ट्रक्चर में सुधार और नई भर्तियों की प्रक्रिया को मंजूरी के लिए प्रस्तावित किया जाएगा।
केंद्र का मानना है कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए वित्तीय संसाधनों का सही उपयोग जरूरी है। यदि सैलरी पर अत्यधिक खर्च को कम किया गया, तो अस्पतालों, क्लीनिकों और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
इस दिशा में कदम उठाकर हरियाणा सरकार न केवल वित्तीय संतुलन बनाएगी, बल्कि आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं भी सुनिश्चित करेगी।
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