मर्डर के मामले में पुलिस पर सबूत मिटाने के आरोप

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Karkhana Village
मृतक युवक का फाईल फोटो।

3 महीने बीत जाने के बाद भी पुलिस नहीं कर पाई मर्डर का खुलासा

सफीदों, (एस• के• मित्तल) : उपमंडल के गांव कारखाना में करीब 3 महीने पहले हुए युवक रुबल के मर्डर मामले में पुलिस अभी तक भी मर्डर का खुलासा नहीं कर पाई है। ऐसे में पीड़ित परिवार पुलिस कार्रवाई से असंतुष्ट है। मामले में शिकायतकर्ता विधवा मां ने पुलिस पर सबूत मिटाने के भी आरोप लगाए हैं। जिसकी एक शिकायत 30 दिसंबर को राज्यपाल हरियाणा, मुख्यमंत्री, डीजीपी व प्रधानमन्त्री को भेजी गई है। जिसमें पुलिस जांच तब्दील करवाने की मांग की है। शिकायत में कहा कि सफीदों पुलिस की गतिविधियां शक के दायरे में है। पुलिस द्वारा उसके मृतक बेटे रूबल की विसरा रिपोर्ट व डॉक्टरों अंतिम पोस्टमार्टम राय भी उन्हें नहीं दिखाई जा रही। उसके इकलौते बेटे का 5 अक्टूबर 2025 को मर्डर हुआ। जिसमें पुलिस ने पहले इत्तफाकिया कार्रवाई की, जब उन्होंने उच्च अधिकारियों को शिकायत लगाई तो करीब एक महीने बाद 4 नवंबर को हत्या की धाराओं में केस दर्ज किया गया। पूरे मामले में पुलिस लगातार कुछ ना कुछ खामियां छोड़ रही है। उसके बेटे की 5 अक्टूबर 2025 मृत्यु होने के बाद जब सफीदों में डॉक्टर पोस्टमार्टम करने लगे तो, डॉक्टरों ने उसके बेटे का मर्डर होने का अंदेशा जताया और अपनी रिपोर्ट में इसे मर्डर का संदिग्ध केस बताकर खानपुर मेडिकल में पोस्टमार्टम करवाने के लिए रेफर किया था। संदिग्ध केस होने के बावजूद भी सफीदों सदर थाना पुलिस ने मामले में धारा 194 बीएनएस में इत्तफाकिया कार्रवाई की और मर्डर केस को रफा-दफा करने की कोशिश की। पुलिस ने उक्त मामले कोई कार्यवाही नहीं की। उसके बेटे का विसरा पुलिस ने पीजीआई खानपुर से 5 अक्टूबर को ही प्राप्त कर ली थी। लेकिन पुलिस ने विसरा को खुर्द-बुर्द करने की कोशिश की। पुलिस ने विसरा को सुनारिया एफएस लैब नहीं भेजा। इसके बाद उसके द्वारा मामले की शिकायत सफीदों डीएसपी, एसपी जींद व डीजीपी हरियाणा को की गई तो 25 दिन बाद 30 अक्टूबर 2025 उसके बेटे का विसरा रिपोर्ट एफएस लैब सुनारिया भेजा गया। वह जब भी मामले में पुलिस अधिकारियों से उक्त जांच बारे संपर्क करती है या मिलती है तो, पुलिसकर्मी उसके साथ गलत तरीके से पेश आते हैं। जोकि उसको डांट-फटकार लगाते है। 25 दिसंबर को पुलिस ने भी विसरा रिपोर्ट प्राप्त कर ली है। लेकिन आज तक भी पुलिस ने उसके बेटे के मर्डर केस मामले में उसे विश्वास में नहीं लिया और ना ही उसको विसरा रिपोर्ट नहीं दिखाई जा रही। उक्त सभी कारणों से पुलिस लगातार दोषियों को बचाने की कोशिश कर रही है। पुलिस अधिकारियो का आरोपियों से से मिलीभगत का अंदेशा है। जिस कारण से पुलिस कोई कार्यवाही नहीं कर रही है। इसलिए उक्त मुकदमें की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी सीबीआई, रिटायर्ड जज, दिल्ली पुलिस या चण्डीगढ पुलिस से करवाई जाए। ताकि उसके बेटे के मर्डर की सच्चाई सबके सामने आ सकें। उसके बेटे की सभी रिपोर्ट मेडिकल रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, विसरा रिपोर्ट उसे उपलब्ध करवाई जाए। पुलिस कर्मचारी या अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग किया। उनके ऊपर भी कानूनी कार्यवाही की जाए।
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क्या कहते हैं डीएसपी
इस मामले में डीएसपी गौरव शर्मा ने कहा कि एक तो आम मर्डर होता है, जिसमें सारे एविडेंस (सबूत) होते हैं। उसमें पता चल जाता है कि यह मर्डर किसने किया। लेकिन यह एक कॉम्प्लिकेटेड (उलझी हुई हत्या की गुत्थी) मर्डर है। पुलिस मामले में हर सबूत जुटाने में लगी हुई है, चाहे मामले में पॉलीग्राफ टेस्ट करवाने की बात हो पुलिस वह अभी करवाएगी। मामले में फिलहाल जांच जारी है। विसरा रिपोर्ट में क्या आया वह पुलिस अभी डिस्क्लोज नहीं कर सकती।

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