लैंड पूलिंग एक्ट के विरोध में किसानों का ऐलान:

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Land Pooling Act
Land Pooling Act

48 घंटे में कानून निरस्त न हुआ तो प्रदेश में करेंगे आंदोलन

किसानों ने लैंड पूलिंग एक्ट के विरोध में एक सख्त रुख अपनाया है। कृषि समुदाय ने साफ कहा कि यदि 48 घंटे के भीतर यह कानून निरस्त नहीं किया गया, तो वे पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू करेंगे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह कानून किसानों के अधिकारों के लिए हानिकारक है और उन्हें उनकी जमीन से बेदखल करने का प्रयास करता है।

किसानों ने विभिन्न जिलों में बैठकें आयोजित की और सरकार को चेतावनी दी कि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन से लेकर अन्य रणनीतियों तक का सहारा लेंगे। उनका कहना है कि लैंड पूलिंग एक्ट के तहत निजी और सार्वजनिक हितों के नाम पर किसानों की जमीन जबरन अधिगृहीत की जा सकती है, जिससे कृषि योग्य भूमि की कमी और आर्थिक संकट पैदा होगा।

किसानों के प्रतिनिधियों ने मीडिया को बताया कि कानून के माध्यम से उन्हें उनकी जमीन का उचित मूल्य या विकल्प नहीं मिल रहा है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि अधिग्रहित जमीन का पुनर्वितरण और विकास योजना पारदर्शी नहीं है। यही कारण है कि किसान कानून के तत्काल निरसन की मांग कर रहे हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया अभी तक सीमित रही है। अधिकारियों ने कहा है कि किसानों के मुद्दों को गंभीरता से लिया जा रहा है और बातचीत के माध्यम से समाधान निकाले जाने का प्रयास होगा। वहीं, किसानों ने स्पष्ट किया कि 48 घंटे की समय सीमा के बाद उनका आंदोलन और तेज होगा, जिसमें सड़कों पर प्रदर्शन और जिलों में धरने शामिल हो सकते हैं।

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