पंचायत की जमीन पर आने-जाने के रास्तों को लेकर नई सख्ती, ग्रामसभा की सहमति जरूरी

3
Panchayati land

ग्राम स्तर पर भूमि उपयोग को लेकर नियम होंगे और पारदर्शी

हरियाणा में पंचायती भूमि के उपयोग को लेकर नियमों को और सख्त किया जा रहा है। अब गांवों में यदि किसी पंचायती जमीन पर आवागमन के लिए रास्ता बनाया जाना है या किसी पुराने रास्ते को नियमित किया जाना है, तो इसके लिए ग्रामसभा की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। इससे बिना सहमति के होने वाले अतिक्रमण और मनमाने उपयोग पर रोक लगने की उम्मीद है।

नए प्रावधानों के तहत यह साफ किया गया है कि जिस भूमि पर रास्ता बनाया जाएगा, उसका स्वामित्व पंचायत के पास ही रहेगा। यानी जमीन को व्यक्तिगत संपत्ति नहीं माना जाएगा और न ही इससे किसी व्यक्ति को स्थायी मालिकाना हक मिलेगा। केवल सार्वजनिक उपयोग और गांव की जरूरत के आधार पर ही इस तरह की अनुमति दी जा सकेगी।

सरकार के इस कदम का उद्देश्य गांवों में भूमि विवादों को कम करना और पंचायत संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। कई जगहों पर देखा गया है कि पंचायती जमीन पर रास्ता, निकासी मार्ग या अन्य उपयोग के नाम पर लंबे समय तक कब्जा बना रहता है। बाद में यही कब्जे विवाद का कारण बनते हैं। नई व्यवस्था से ऐसी स्थिति पर नियंत्रण मिलने की उम्मीद है।

ग्रामसभा की भूमिका को मजबूत करने से यह भी सुनिश्चित होगा कि कोई भी फैसला केवल कुछ लोगों के दबाव में न लिया जाए। गांव के अधिकतर लोग यदि किसी रास्ते की जरूरत महसूस करते हैं, तभी उस पर आगे कार्रवाई हो सकेगी। इससे सामूहिक निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा मिलेगा।

इस बदलाव को ग्रामीण प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। साथ ही, पंचायती भूमि की वास्तविक पहचान और उसके सार्वजनिक स्वरूप को बनाए रखने में भी यह नियम मददगार साबित हो सकता है। अब गांवों में भूमि से जुड़े निर्णय अधिक सोच-समझकर और नियमों के दायरे में लिए जाने की संभावना है।

Loading