मेयर चुनाव में जातीय गणित अहम, कांग्रेस-भाजपा में सीधी टक्कर

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Panchkula Mayor Election

वैश्य और पंजाबी वोट बैंक पर टिकी रणनीति, प्रत्याशी चयन से बदलेगा चुनावी समीकरण

पंचकूला नगर निगम के मेयर चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है, जहां दोनों दल प्रत्याशी चयन में सामाजिक समीकरणों को खास महत्व दे रहे हैं। इस चुनाव में वैश्य और पंजाबी समुदाय की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है, क्योंकि शहर में इन दोनों वर्गों के वोटरों की संख्या सबसे अधिक बताई जा रही है।

भाजपा की रणनीति वैश्य समाज पर केंद्रित नजर आ रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा वैश्य समुदाय से मेयर प्रत्याशी उतारकर अपने परंपरागत वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश कर सकती है। इससे पहले भी नगर निगम चुनावों में वैश्य समाज का झुकाव भाजपा की ओर रहा है, जिसे पार्टी भुनाने की तैयारी में है। संगठन का मानना है कि यदि वैश्य मतदाताओं का एकमुश्त समर्थन मिल गया, तो चुनावी राह आसान हो सकती है।

वहीं कांग्रेस भी इस समीकरण को संतुलित करने की रणनीति पर काम कर रही है। चर्चा है कि कांग्रेस पंजाबी समुदाय से प्रत्याशी उतारकर बड़ा दांव खेल सकती है। पंचकूला में पंजाबी समाज का प्रभावशाली वोट बैंक माना जाता है, जो कई वार्डों में परिणाम बदलने की क्षमता रखता है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि पंजाबी उम्मीदवार उतारने से पार्टी को शहरी क्षेत्रों में सीधा लाभ मिल सकता है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस बार मेयर चुनाव केवल पार्टी विचारधाराओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व भी बड़ा मुद्दा बनेगा। दोनों ही दल वार्ड स्तर पर समीकरण साधने में जुटे हुए हैं और संभावित प्रत्याशियों के नामों पर मंथन जारी है।

इसके अलावा स्थानीय मुद्दे जैसे सफाई व्यवस्था, जलापूर्ति, सड़क और ट्रैफिक जैसी समस्याएं भी चुनाव में अहम भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि अंतिम फैसला प्रत्याशी चयन पर निर्भर करेगा, क्योंकि सही समुदाय से उम्मीदवार उतारना जीत-हार की दिशा तय कर सकता है।

कुल मिलाकर पंचकूला मेयर चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ा मुकाबला तय माना जा रहा है, जहां वैश्य और पंजाबी वोट बैंक चुनावी गणित का केंद्र बिंदु बन चुके हैं।

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