‘एस्ट्रम ला रेगेंस’ प्रोजेक्ट के बिल्डर को आदेश—खरीदारों को ब्याज सहित भुगतान करना होगा
पानीपत के प्रमुख रियल एस्टेट प्रोजेक्ट ‘एस्ट्रम ला रेगेंस’ के बिल्डर को हाल ही में हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (HRERA) से बड़ा झटका लगा है। HRERA ने बिल्डर को आदेश दिया है कि फ्लैट कब्जे में देरी होने पर खरीदारों को तय समय के हिसाब से ब्याज सहित भुगतान किया जाए। यह निर्णय प्रोजेक्ट की समय पर डिलीवरी न करने और खरीदारों को हो रही असुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
HRERA के आदेश में कहा गया है कि बिल्डर को प्रत्येक प्रभावित खरीदार को देरी की अवधि के अनुसार ब्याज सहित मुआवजा देना होगा। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई केवल शिकायतकर्ता ग्राहकों तक सीमित नहीं, बल्कि सभी उन लोगों पर लागू होगी, जिनके फ्लैट की डिलीवरी निर्धारित समय पर नहीं हो सकी।
खरीदारों का कहना है कि उन्होंने समय पर भुगतान किया, लेकिन फ्लैट कब्जे में देरी के कारण उन्हें अतिरिक्त किराया और अन्य खर्च उठाने पड़े। कई खरीदारों ने HRERA में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद यह आदेश आया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला बिल्डर्स के लिए एक चेतावनी भी है कि वे समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करें, नहीं तो उन्हें कानूनी और वित्तीय परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
प्रोजेक्ट के बिल्डर ने अभी तक HRERA के आदेश पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, खरीदारों ने आदेश का स्वागत किया है और इसे न्यायपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि अब उन्हें अपनी राशि और देरी के कारण हुए नुकसान का उचित मुआवजा मिलेगा।
HRERA का यह कदम रियल एस्टेट सेक्टर में समय पर डिलीवरी और खरीदारों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है। इसके जरिए बिल्डर्स के लिए यह संदेश भी साफ है कि नियामक संस्थाओं की नजर में देरी की कोई छूट नहीं है।
![]()











