पानीपत। जिला नागरिक अस्पताल की इमरजेंसी में सोमवार रात उपचार के लिए पहुंची करीब 50 वर्षीय महिला की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए मामले की जांच की मांग की। मृतका की पहचान गांव शिमला गुजरान निवासी नफीसा के रूप में हुई है। उनके पति का नाम मेहरद्दीन है और परिवार में दो बेटे तथा एक बेटी हैं। जानकारी के अनुसार, सोमवार रात नफीसा को खून की उल्टियां होने लगी थीं। हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें करीब दस बजे जिला नागरिक अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे। मृतका के पड़ोसी आजाद सिंह ने बताया कि अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने महिला को इंजेक्शन लगाया और दवाइयां दीं। परिजनों को उम्मीद थी कि गंभीर हालत को देखते हुए महिला को भर्ती कर उपचार शुरू किया जाएगा, लेकिन उनका आरोप है कि चिकित्सकों ने भर्ती करने से इनकार कर दिया। परिजनों के मुताबिक, उन्हें अगले दिन छुट्टी होने और उसके बाद अस्पताल आने की बात कही गई। आरोप है कि अस्पताल से निकलने के बाद महिला की तबीयत लगातार बिगड़ती गई। परिजन उसे गाड़ी में लेकर अस्पताल के मुख्य द्वार तक पहुंचे, जहां उसकी मौत हो गई। इसके बाद परिजन महिला को दोबारा इमरजेंसी में लेकर आए। उनका आरोप है कि चिकित्सकों ने महिला की जांच करने से भी इनकार कर दिया। इससे नाराज परिजनों ने इमरजेंसी के बाहर विरोध जताया और अस्पताल की उपचार व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। आजाद सिंह ने आरोप लगाया कि महिला की हालत गंभीर होने के बावजूद उसे समय पर आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई गई। परिजनों का कहना है कि यदि महिला को तत्काल भर्ती करके समुचित उपचार दिया जाता तो संभवतः उसकी जान बचाई जा सकती थी। घटना के बाद परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था। हालांकि, महिला की मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण और उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही हुई या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अस्पताल प्रशासन का पक्ष भी उपलब्ध जानकारी में सामने नहीं आया है। मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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