रियल एस्टेट कंपनी को करारा झटका, उपभोक्ता के हक में फैसला

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Real Estate Dispute

देरी और शर्तों पर सख्ती, खरीदार को मिला राहत का आदेश

पानीपत की एक प्रमुख आवासीय परियोजना से जुड़े मामले में रियल एस्टेट प्रमोटर को बड़ा झटका लगा है। प्लॉट देने में देरी और खरीदार से की गई अतिरिक्त व अवैध मांगों को लेकर सक्षम प्राधिकरण ने सख्त रुख अपनाया है। आदेश के तहत प्रमोटर को न केवल ऐसी मांगें वापस लेनी पड़ीं, बल्कि देरी की अवधि के लिए ब्याज भी अदा करना पड़ा।

मामले के अनुसार, खरीदार ने तय समय पर भुगतान करने के बावजूद लंबे समय तक प्लॉट का कब्जा नहीं मिलने की शिकायत दर्ज कराई थी। प्रमोटर की ओर से कब्जा देने में लगातार देरी की गई और इस दौरान कुछ अतिरिक्त शर्तें भी जोड़ी गईं, जिन्हें खरीदार ने अनुचित बताया। शिकायत की सुनवाई के दौरान दस्तावेजों और भुगतान रिकॉर्ड की गहन जांच की गई।

प्राधिकरण ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यदि खरीदार ने समझौते के अनुसार अपनी जिम्मेदारियां निभाई हैं, तो प्रमोटर को भी समयबद्ध तरीके से प्लॉट हैंडओवर करना होगा। देरी के लिए ब्याज देना नियमों के तहत जरूरी है और किसी भी तरह की अतिरिक्त या अवैध मांग स्वीकार्य नहीं है। इसी आधार पर प्रमोटर को करीब 2.57 लाख रुपये ब्याज के रूप में भुगतान करने का निर्देश दिया गया।

फैसले में यह भी कहा गया कि रियल एस्टेट कंपनियां खरीदारों पर मनमानी शर्तें नहीं थोप सकतीं। परियोजना से जुड़े नियम और शर्तें वही मान्य होंगी, जो मूल समझौते में स्पष्ट रूप से दर्ज हों। बाद में जोड़ी गई शर्तों को अमान्य करार दिया गया है।

इस आदेश को रियल एस्टेट सेक्टर में उपभोक्ताओं के अधिकारों के लिए अहम माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि ऐसे फैसले उन खरीदारों के लिए मिसाल बन सकते हैं, जो लंबे समय से कब्जा न मिलने या अतिरिक्त मांगों से परेशान हैं।

वहीं प्रमोटर पक्ष का कहना है कि वे आदेश का अध्ययन कर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर विचार करेंगे। कुल मिलाकर, यह फैसला रियल एस्टेट कंपनियों को समयसीमा और नियमों के पालन का स्पष्ट संदेश देता है।

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