स्मॉग और ठंडी हवाओं ने हवा को दूषित किया;
सभी के लिए जोखिम, संवेदनशील वर्गों को विशेष सतर्कता चाहिए
राजधानी दिल्ली में वायु-प्रदूषण का संकट बरकरार है। हालिया माप में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) कई स्थानों पर 300 से ऊपर पहुंच चुका है, जो “बहुत खराब” श्रेणी में आता है और सामान्य लोगों के साथ-साथ खासकर बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएँ तथा हृदय/श्वसन रोगी के लिए गंभीर जोखिम दर्शाता है। स्मॉग-धुंध, ठंडी हवाओं का कम प्रवाह और गतिरोधित वायु ने कणों (PM2.5 व PM10) के जमाव को बढ़ा दिया है, जिससे दृश्यता घटने और सांस संबंधी शिकायतें बढ़ने लगी हैं।
शहर में रोजमर्रा के स्रोत — वाहन उत्सर्जन, निर्माण धूल, औद्योगिक निकास और निकटवर्ती क्षेत्रों में पराली जलाने जैसी गतिविधियाँ — प्रदूषण के प्रमुख कारण बने हुए हैं। मौसम के अनुकूल परिस्थितियों ने इन प्रदूषकों को फैलने से रोका और वायु-गुणवत्ता और बिगड़ गई। परिणामस्वरूप लोगों में खांसी, आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ जैसी शिकायतें आम देखने को मिल रही हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि आज और कल अनावश्यक बाहर निकलने से बचें; यदि बाहर जाना जरूरी हो तो एन95 जैसे बेहतर मास्क का उपयोग करें। घरों में दरवाज़े-खिड़कियाँ बंद रखें, जहां संभव हो वायु-शुद्धिकरण या कम से कम गीले कपड़े से घर के अंदर धूल जमने को कम रखें। छोटे बच्चों और बुज़ुर्गों को खोलकर बाहर नहीं भेजें और जो लोग असामान्य श्वास संबंधी लक्षण महसूस करें उन्हें तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।
प्रशासन और मौसम विभाग की नजर लगातार बनी हुई है; अगर हवाएँ गति पकड़ें तो कुछ हद तक राहत मिलने की संभावना है, पर फिलहाल नागरिकों को स्वयं सक्षम सावधानी बरतनी होगी।
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