गांव बहादुरगढ़ में 80 साल से चल रही द्वारका रामलीला रामलीला हमारी प्राचीन संस्कृति की धरोहर: आचार्य विकास कुमार

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सफीदों, (एस• के• मित्तल) : सफीदों के गांव बहादुरगढ़ में पिछले 80 वर्षों से श्री द्वारका रामलीला का मंचन होता आ रहा है। इसी कड़ी में बुधवार को भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह का प्रसंग प्रस्तुत किया गया, जिसे देखकर दर्शक भाव-विभोर हो उठे। इस मौके पर बतौर मुख्यातिथि समाजसेवी आचार्य विकास कुमार ने शिरकत की। इस दौरान उन्होंने रामलीला में अभिनय कर रहे कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और उनकी प्रतिभा की सराहना करते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की। श्री द्वारका रामलीला क्लब की ओर से आचार्य विकास कुमार को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। अपने संबोधन में आचार्य विकास कुमार ने कहा कि रामलीला हमारी प्राचीन धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं का अभिन्न हिस्सा है। आज के आधुनिक दौर में जहां हमारी कई पुरानी परंपराएं धीरे-धीरे लुप्त होती जा रही हैं, वहीं गांव बहादुरगढ़ जैसे गांव इन परंपराओं को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। पिछले आठ दशकों से रामलीला का निरंतर आयोजन करना अपने आप में सराहनीय कार्य है। यह गांव के लोगों की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक चेतना और अपनी विरासत के प्रति समर्पण को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, त्याग, सत्य, कर्तव्य और पारिवारिक संस्कारों को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। भगवान श्रीराम का जीवन हमें कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने ग्रामीणों और रामलीला कमेटी से इस परंपरा को आगे भी इसी तरह जारी रखने का आह्वान किया, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी भगवान श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा ले सकें। इस मौके पर दीपक सैनी, मोहन सैनी, बूरा मास्टर, भीषण सैनी, वितेश, रोहित सहित गांव के अनेक ग्रामीण मौजूद रहे।

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