पंजाब के मोहाली में साझा दीवार को लेकर चल रहा विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। आरोप है कि मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद स्थानीय पुलिस ने समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की, जिसके बाद पीड़ित पक्ष को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
मामले की सुनवाई के दौरान Punjab and Haryana High Court ने इस पर कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने मोहाली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को मामले की निगरानी करने और तय समयसीमा में प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।
विवाद एक साझा दीवार को लेकर बताया जा रहा है, जिसमें दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से तनातनी चल रही है। पीड़ित का आरोप है कि दूसरी ओर से दीवार को लेकर जबरन हस्तक्षेप किया गया और विरोध करने पर धमकियां भी दी गईं। शिकायत के बाद एफआईआर दर्ज तो की गई, लेकिन आगे की कार्रवाई में देरी होने से मामला उलझता चला गया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है और ऐसे मामलों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी मामले में शिकायत दर्ज हो चुकी है, तो उसकी निष्पक्ष और समयबद्ध जांच होना जरूरी है।
इस आदेश के बाद पुलिस विभाग में हलचल बढ़ गई है और जांच को गति देने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए मामले की गहन जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर विवादों के समाधान में देरी क्यों होती है और लोगों को न्याय पाने के लिए अदालत का सहारा क्यों लेना पड़ता है।
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