गिरोह में शामिल लड़कियों के मिले सुराग, पुलिसकर्मियों से मिलीभगत की आशंका
हरियाणा के सिरसा में सामने आए हनीट्रैप केस में पुलिस जांच के दौरान लगातार चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। अब इस मामले की सरगना के कई प्राइवेट सोशल मीडिया और मैसेजिंग अकाउंट मिलने से जांच को नई दिशा मिली है। इन अकाउंट्स के जरिए ही हाई-प्रोफाइल लोगों को जाल में फंसाया जाता था। पुलिस ने इन अकाउंट्स की डिजिटल फोरेंसिक जांच शुरू कर दी है।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह में कई युवतियां शामिल थीं, जो अलग-अलग नाम और पहचान का इस्तेमाल कर लोगों से संपर्क करती थीं। पुलिस को कुछ लड़कियों के ठिकानों और पहचान से जुड़े इनपुट भी मिले हैं, जिन पर जल्द ही छापेमारी की जा सकती है। पूछताछ में यह भी पता चला है कि शिकार बनाए गए लोगों को पहले भावनात्मक रूप से फंसाया जाता था, फिर आपत्तिजनक सामग्री के जरिए ब्लैकमेल कर मोटी रकम वसूली जाती थी।
सबसे गंभीर बात यह है कि इस पूरे नेटवर्क को चलाने में कुछ पुलिसकर्मियों से मिलीभगत की आशंका भी गहराती जा रही है। पुलिस के उच्च अधिकारियों ने इस एंगल से भी जांच तेज कर दी है। यदि किसी भी पुलिसकर्मी की संलिप्तता पाई जाती है तो उसके खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक गिरोह की सरगना बेहद शातिर तरीके से काम करती थी और हर पीड़ित के लिए अलग अकाउंट और अलग रणनीति अपनाई जाती थी, ताकि किसी तरह का शक न हो। अब साइबर सेल की टीम पुराने चैट रिकॉर्ड, ट्रांजैक्शन डिटेल और कॉल डाटा की भी बारीकी से जांच कर रही है।
इस मामले में पहले ही कई आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जबकि कुछ की तलाश जारी है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया जाएगा और सभी दोषियों को कानून के कटघरे में लाया जाएगा।
![]()











