डिजिटल चालबाजी से सफाई व्यवस्था पर सवाल

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Sonipat sanitation issue

AI से ‘साफ’ दिखाया गया कूड़ा: बिना कर्मचारी भेजे फोटो एडिट कर पोर्टल पर डाला

हरियाणा के सोनीपत जिले में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि नगर निगम या संबंधित एजेंसी ने बिना किसी सफाई कर्मचारी को मौके पर भेजे ही कूड़ा हटाने का दावा कर दिया। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से फोटो को एडिट किया गया और उसे समाधान पोर्टल पर अपलोड कर शिकायत का निपटारा दिखा दिया गया।

जानकारी के अनुसार, एक स्थानीय नागरिक ने सार्वजनिक स्थान पर पड़े कूड़े की शिकायत समाधान पोर्टल पर दर्ज कराई थी। कुछ समय बाद पोर्टल पर शिकायत का स्टेटस “समाधान हो गया” दिखा दिया गया। जब शिकायतकर्ता दोबारा मौके पर पहुंचा, तो वहां कूड़ा पहले की तरह मौजूद था। इसके बाद पोर्टल पर अपलोड की गई फोटो को ध्यान से देखा गया, जिसमें साफ तौर पर एडिटिंग के संकेत नजर आए।

आरोप है कि AI टूल की मदद से कूड़े को फोटो से हटाकर जगह को साफ दिखाया गया, ताकि कागजों में शिकायत का निस्तारण हो सके। स्थानीय लोगों का कहना है कि न तो सफाई कर्मचारी मौके पर आए और न ही कोई वाहन दिखा, फिर भी रिकॉर्ड में काम पूरा बताया गया।

इस मामले के सामने आने के बाद नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सामाजिक संगठनों और वार्ड के लोगों ने मांग की है कि इस तरह की डिजिटल हेराफेरी करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि तकनीक का इस्तेमाल जनता को गुमराह करने के लिए किया जाएगा, तो सरकारी पोर्टलों पर लोगों का भरोसा खत्म हो जाएगा।

वहीं, प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच की बात कही जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि फोटो सत्यापन और शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी। यदि AI के दुरुपयोग या जानबूझकर गलत जानकारी अपलोड करने की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्ति पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला न सिर्फ सोनीपत बल्कि पूरे प्रदेश के लिए चेतावनी है कि तकनीक का इस्तेमाल पारदर्शिता बढ़ाने के लिए होना चाहिए, न कि जिम्मेदारी से बचने के लिए।

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