नई दिल्ली/चंडीगढ़: सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा की रिमिशन (समयपूर्व रिहाई) नीति से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए राज्य की नीति को लेकर अहम कानूनी स्पष्टता प्रदान की है। इस फैसले का असर कैदियों की समयपूर्व रिहाई से संबंधित प्रक्रियाओं और नियमों पर पड़ेगा।
अदालत के निर्णय के अनुसार, समयपूर्व रिहाई से जुड़े मामलों में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और नीति का पालन किया जाएगा। फैसले के बाद संबंधित नियमों और प्रक्रियाओं में आवश्यक बदलाव किए जाने की संभावना है, ताकि वे न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप हों।
इस निर्णय में राज्यपाल की संवैधानिक भूमिका और शक्तियों को भी महत्वपूर्ण आधार मिला है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत निर्णय प्रक्रिया कानून और निर्धारित नियमों के अनुरूप ही संचालित होगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में रिमिशन से जुड़े मामलों में मार्गदर्शक सिद्ध होगा और राज्य सरकारों को अपनी नीतियों को संवैधानिक एवं कानूनी मानकों के अनुरूप लागू करने में मदद करेगा।
महत्वपूर्ण: फैसले के प्रभाव और संशोधित नियमों का स्वरूप संबंधित न्यायिक आदेश तथा राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचनाओं के आधार पर स्पष्ट होगा।
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