खंडवा से रैफर 8 महीने की बच्ची 5 घंटे तक एम्बुलेंस में रही
इंदौर के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर की कमी ने एक बार फिर स्वास्थ्य प्रणाली की गंभीर खामियों को उजागर किया है। खंडवा से रैफर की गई 8 महीने की बच्ची, जिसे ब्रेन की गंभीर बीमारी थी, 5 घंटे तक एम्बुलेंस में ही रहकर अस्पताल की प्रतीक्षा में बितानी पड़ी। इस दौरान बच्ची की हालत नाजुक बनी रही और परिवार में चिंता की लहर दौड़ गई।
सूत्रों के अनुसार, बच्ची को इंदौर के बड़े सरकारी अस्पताल में भर्ती कराना था। खंडवा अस्पताल से रैफर होने के बाद जैसे ही बच्ची को पहुंचाया गया, अस्पताल में वेंटिलेटर की कमी के कारण उसे तुरंत भर्ती नहीं किया जा सका। परिवार ने बार-बार डॉक्टरों और प्रशासन से मदद की गुहार लगाई, लेकिन 5 घंटे तक कोई उपलब्ध वेंटिलेटर नहीं मिला।
इस दौरान बच्ची को एम्बुलेंस में ही इलाज देने की कोशिश की गई, लेकिन ब्रेन की गंभीर बीमारी के कारण उसकी स्थिति में लगातार गिरावट आई। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर आरोप लगाया कि वेंटिलेटर की कमी के चलते बच्ची की जान जोखिम में पड़ी।
स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वेंटिलेटर की कमी और अस्पतालों में संसाधनों की अपर्याप्तता गंभीर मुद्दा है, और इस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी बताया कि आगामी दिनों में वेंटिलेटर की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
घटना ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नागरिकों और सोशल मीडिया पर लोगों ने अस्पतालों में पर्याप्त मेडिकल संसाधनों की मांग की है। विशेषज्ञों का कहना है कि इमरजेंसी मामलों में वेंटिलेटर की अनुपलब्धता जानलेवा साबित हो सकती है।
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