राजकोष का ब्योरा: कमाई और खर्च का विस्तृत खाका

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कर संग्रह से आय में बढ़ोतरी, वेतन-पेंशन और ब्याज पर बड़ा हिस्सा व्यय

राज्य के ताज़ा वित्तीय दस्तावेज में आय और व्यय का विस्तृत ब्यौरा पेश किया गया है। आंकड़ों के अनुसार, सरकार को मिलने वाले प्रत्येक एक रुपये में से लगभग 28 पैसे वेतन, पेंशन और ऋण पर दिए जाने वाले ब्याज के भुगतान में खर्च हो रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि राजकोष का बड़ा हिस्सा अनिवार्य प्रतिबद्धताओं में चला जाता है, जिससे विकास योजनाओं के लिए उपलब्ध संसाधनों पर दबाव बनता है।

आय के प्रमुख स्रोतों में वस्तु एवं सेवा कर (GST) सबसे आगे है। इसके बाद स्टाम्प शुल्क और बिजली-पानी के बिलों से होने वाली प्राप्तियां भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उत्पाद शुल्क, मोटर वाहन कर और अन्य शुल्क भी राजस्व में उल्लेखनीय हिस्सेदारी निभा रहे हैं। सरकार का दावा है कि कर संग्रह में सुधार और डिजिटलीकरण के कारण आय में स्थिर वृद्धि दर्ज की गई है।

व्यय पक्ष पर सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर भी पर्याप्त राशि निर्धारित की गई है। हालांकि वेतन और पेंशन का बढ़ता बोझ दीर्घकालीन वित्तीय संतुलन के लिए चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पूंजीगत निवेश बढ़ाया जाए तो आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी और भविष्य में राजस्व आधार मजबूत होगा।

वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, राजस्व बढ़ाने और अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ संसाधनों का उपयोग किया जाएगा ताकि विकास परियोजनाओं को गति मिल सके और आम नागरिकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचे।

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