पंचकूला में कथित फर्जी कॉल सेंटर के खुलासे के बाद जांच एजेंसियां लगातार मामले की परतें खोल रही हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह कॉल सेंटर लंबे समय से संचालित हो रहा था और इसके संचालन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां अब सामने आ रही हैं। मामले ने साइबर अपराध और संगठित धोखाधड़ी को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कॉल सेंटर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए हर माह लगभग 15 लाख रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया जाता था। कर्मचारियों को कथित तौर पर विदेशी ग्राहकों से संपर्क करने और विभिन्न तरीकों से वित्तीय लेनदेन कराने के लिए प्रशिक्षित किया जाता था। हालांकि जांच एजेंसियां अभी यह पता लगाने में जुटी हैं कि पूरे नेटवर्क का संचालन किस स्तर पर और किन लोगों की देखरेख में किया जा रहा था।
बताया जा रहा है कि संबंधित परिसर में पिछले करीब 10 वर्षों से किरायानामा (रेंट एग्रीमेंट) के आधार पर गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। कर्मचारियों के लिए पिक एंड ड्रॉप जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती थीं, जिससे यह एक सामान्य कॉर्पोरेट कार्यालय की तरह दिखाई देता था। इसी कारण लंबे समय तक इसकी गतिविधियों पर किसी को संदेह नहीं हुआ।
छापेमारी और जांच के दौरान कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड बरामद किए गए हैं। अब विशेषज्ञ टीमें इनकी जांच कर संभावित वित्तीय लेनदेन, संपर्कों और अन्य गतिविधियों का विश्लेषण कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।
पुलिस और साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी और फर्जी कॉल सेंटर के मामलों में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी संदिग्ध कॉल, ईमेल या वित्तीय मांग पर तुरंत भरोसा करने के बजाय उसकी सत्यता की जांच करनी चाहिए।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और एजेंसियां पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।
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