पब्लिक सेफ्टी और बुनियादी सुविधाओं पर असर का मुद्दा, 5 बड़े शहरों में लोगों का विरोध तेज
हरियाणा में स्टिल्ट+4 मंजिला इमारतों के निर्माण पर रोक लगाने के पीछे कई गंभीर कारण सामने आए हैं। राज्य के पांच बड़े शहरों में इस तरह की इमारतों के खिलाफ लोगों का विरोध लगातार बढ़ रहा था, जिसके चलते सरकार को यह निर्णय लेना पड़ा। नागरिकों का कहना है कि इस प्रकार के निर्माण से सार्वजनिक सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
स्टिल्ट+4 बिल्डिंग मॉडल में ग्राउंड फ्लोर को पार्किंग के लिए छोड़कर ऊपर चार मंजिलों का निर्माण किया जाता है। हालांकि, शहरी इलाकों में बढ़ती जनसंख्या और सीमित संसाधनों के बीच यह मॉडल कई समस्याओं को जन्म दे रहा है। सबसे बड़ी चिंता सुरक्षा को लेकर जताई जा रही है। संकरी गलियों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में ऐसी ऊंची इमारतों के कारण आपातकालीन सेवाओं जैसे फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस की पहुंच बाधित हो सकती है।
इसके अलावा, पार्किंग की समस्या भी गंभीर रूप ले रही है। स्टिल्ट फ्लोर होने के बावजूद पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था नहीं हो पा रही, जिससे सड़कों पर वाहन खड़े होने लगे हैं और ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही है।
सीवरेज और पानी की व्यवस्था भी इस निर्णय के पीछे एक अहम कारण है। अधिक मंजिलों के निर्माण से आबादी का दबाव बढ़ता है, जिससे सीवरेज सिस्टम पर भार पड़ता है और पानी की आपूर्ति भी प्रभावित होती है। कई इलाकों में पहले से ही इन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों और आरडब्ल्यूए (RWA) ने इस मुद्दे को लेकर सरकार के सामने अपनी चिंताएं रखीं, जिसके बाद प्रशासन ने इस पर गंभीरता से विचार करते हुए निर्माण पर रोक लगा दी।
सरकार का मानना है कि जब तक इन समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक इस तरह के निर्माण को अनुमति देना उचित नहीं होगा। यह फैसला शहरी विकास और नागरिक सुविधाओं के संतुलन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
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