चंडीगढ़ में ऐतिहासिक महत्व से जुड़े फर्नीचर की बिक्री को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। हाल ही में एक विशेष डिजाइन का फर्नीचर 21.8 लाख रुपये में बेचा गया, जिसके बाद इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। यह फर्नीचर शहर की विरासत से जुड़ा माना जाता है, जिससे इसकी नीलामी ने चर्चा को और तेज कर दिया है।
बताया जा रहा है कि इस फर्नीचर पर सरकारी पहचान चिह्न भी मौजूद थे, इसके बावजूद इसकी बिक्री को लेकर पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि इस तरह की वस्तुओं को संरक्षित किया जाना चाहिए, क्योंकि वे शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा हैं।
इस मामले में अब निगरानी को लेकर भी मांग उठने लगी है। विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि इस तरह की नीलामी प्रक्रियाओं पर कड़ी नजर रखी जानी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता से बचा जा सके। कुछ लोगों ने यह भी सुझाव दिया है कि इस तरह की विरासत से जुड़ी वस्तुओं की बिक्री पर सख्त नियम बनाए जाने चाहिए।
यह पहला मौका नहीं है जब इस तरह का मामला सामने आया हो। इससे पहले भी ऐसे फर्नीचर और अन्य वस्तुओं की नीलामी को लेकर विवाद उठ चुके हैं। हर बार यह सवाल उठता है कि क्या इन वस्तुओं को सार्वजनिक संग्रहालयों में सुरक्षित रखा जाना चाहिए या निजी हाथों में जाने दिया जाना चाहिए।
फिलहाल, इस मुद्दे को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा जारी है और संबंधित विभागों से जवाबदेही की मांग की जा रही है। आने वाले समय में इस विषय पर और स्पष्ट दिशा-निर्देश सामने आ सकते हैं।
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