हरियाणा के रोहतक में एक प्रमुख वैश्य शिक्षण संस्था के भीतर इन दिनों आंतरिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। संस्था के प्रधान और कोषाध्यक्ष की सदस्यता समाप्त किए जाने के बाद अब नए नेतृत्व को लेकर चर्चाएं और समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में लिए गए इस फैसले के बाद संस्था के भीतर कई गुट सक्रिय हो गए हैं। अलग-अलग पक्ष अपने-अपने उम्मीदवारों के समर्थन में रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। नए प्रधान के चयन को लेकर लगातार बैठकों और बातचीत का दौर चल रहा है।
संस्था से जुड़े सदस्यों का कहना है कि यह निर्णय नियमों और प्रक्रियाओं के तहत लिया गया है, लेकिन इसके बाद उत्पन्न स्थिति ने माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। कई सदस्य इस फैसले पर खुलकर अपनी राय रख रहे हैं, जिससे अंदरूनी राजनीति और भी स्पष्ट हो रही है।
इस बीच, नए प्रधान के चुनाव को लेकर लॉबिंग तेज हो गई है। संभावित उम्मीदवार अपने समर्थन को मजबूत करने के लिए सक्रिय हो गए हैं और सदस्यों के बीच संपर्क बढ़ा रहे हैं। यह भी माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में संस्था के भीतर और बड़े फैसले हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की संस्थाओं में नेतृत्व परिवर्तन के दौरान इस तरह की गतिविधियां आम होती हैं, लेकिन पारदर्शिता और सहमति बनाए रखना बेहद जरूरी होता है ताकि संस्था के कार्य प्रभावित न हों।
फिलहाल, सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नया प्रधान कौन बनेगा और संस्था की दिशा आगे किस तरह तय होगी। स्थिति को देखते हुए आने वाले समय में और हलचल बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
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