हरियाणा सरकार ने वीआईपी संस्कृति पर नियंत्रण लगाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में अब नेताओं और अधिकारियों के काफिलों में शामिल सरकारी वाहनों की संख्या में भारी कमी की जाएगी। सरकार ने फैसला लिया है कि वीआईपी ड्यूटी में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की संख्या लगभग आधी कर दी जाएगी। इस निर्णय को प्रशासनिक खर्च कम करने और सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि यह फैसला प्रधानमंत्री की ओर से सादगी अपनाने और सरकारी खर्चों में कटौती की अपील के बाद लिया गया है। मुख्यमंत्री स्तर पर हुई समीक्षा बैठक में सुरक्षा व्यवस्था और वीआईपी मूवमेंट को लेकर नए निर्देश जारी किए गए। इसके तहत अब मंत्रियों और कई वरिष्ठ पदाधिकारियों को पहले की तरह लंबा काफिला या अतिरिक्त एक्सकॉर्ट सुविधा नहीं मिलेगी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार नई व्यवस्था लागू होने के बाद केवल आवश्यक सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत ही वाहन तैनात किए जाएंगे। अनावश्यक गाड़ियों और अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती पर रोक लगाई जाएगी। इससे न केवल सरकारी खर्च में कमी आएगी, बल्कि ट्रैफिक व्यवस्था पर पड़ने वाला दबाव भी कम होगा। आम लोगों को सड़कों पर बार-बार रुकने और लंबी वीआईपी मूवमेंट से होने वाली परेशानी से भी राहत मिलने की उम्मीद है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को सरकार की सादगी और जवाबदेही की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है। कई सामाजिक संगठनों ने भी इस कदम का स्वागत किया है। आने वाले दिनों में इस नई नीति को सभी विभागों में सख्ती से लागू करने की तैयारी की जा रही है।
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