हरियाणा सरकार ने सरकारी खर्चों पर नियंत्रण और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विदेशी दौरों पर रोक लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में एक कैबिनेट मंत्री का प्रस्तावित जापान दौरा भी रद्द कर दिया गया है। सरकार अब इस संबंध में विस्तृत गाइडलाइन तैयार कर रही है।
सूत्रों के अनुसार राज्य में बढ़ते आर्थिक दबाव और तेल संकट जैसी परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर खर्चों की समीक्षा की जा रही है। सरकार का मानना है कि आवश्यक सेवाओं और विकास कार्यों को प्राथमिकता देते हुए गैर-जरूरी खर्चों में कटौती की जानी चाहिए। इसी उद्देश्य से विदेश यात्राओं को सीमित करने पर विचार किया जा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक नई गाइडलाइन लागू होने के बाद केवल अत्यंत जरूरी और विशेष अनुमति वाले विदेशी दौरे ही स्वीकृत किए जाएंगे। विभिन्न विभागों से विदेश यात्राओं से जुड़े प्रस्तावों का विवरण भी मांगा गया है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सार्वजनिक धन का उपयोग जरूरत और प्राथमिकता के आधार पर हो।
बताया जा रहा है कि हाल ही में प्रस्तावित जापान दौरे को भी इसी नीति के तहत रद्द किया गया। हालांकि सरकार की ओर से अभी आधिकारिक रूप से विस्तृत दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इसकी तैयारियां तेज हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को लेकर चर्चा बनी हुई है। कुछ लोग इसे वित्तीय अनुशासन की दिशा में अहम कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले तकनीकी और निवेश संबंधी कार्यक्रमों में भागीदारी भी जरूरी होती है।
सरकार का कहना है कि नई नीति का उद्देश्य केवल अनावश्यक खर्चों को नियंत्रित करना है और राज्यहित से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में जरूरत के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
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