हरियाणा में औद्योगिक निवेश और कारोबार को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने भूमि उपयोग परिवर्तन (Change of Land Use – CLU) प्रक्रिया में बड़ा सुधार किया है। नए प्रावधानों के तहत अब उद्योगों को CLU मंजूरी के लिए केवल तीन आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। इसके साथ ही मंजूरी की समय-सीमा को भी कम कर दिया गया है, जिससे निवेशकों और उद्यमियों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकार का मानना है कि जटिल प्रक्रियाओं और अधिक दस्तावेजी औपचारिकताओं के कारण कई परियोजनाओं में देरी होती थी। नई व्यवस्था के लागू होने से आवेदन प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनेगी। इससे उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया तेज होगी और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा।
इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ऑटो-CLU सिस्टम है, जिसे औद्योगिक क्षेत्र में लागू किया जाएगा। इस प्रणाली के माध्यम से पात्र आवेदनों की जांच और मंजूरी की प्रक्रिया काफी हद तक स्वचालित हो जाएगी। इससे मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और अनावश्यक देरी की संभावना भी घटेगी। डिजिटल प्रक्रिया अपनाने से पारदर्शिता और जवाबदेही में भी सुधार आएगा।
उद्योग जगत लंबे समय से मंजूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाने की मांग कर रहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि नई व्यवस्था से निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी और प्रदेश की औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत होगी। विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्योगों को इसका सीधा लाभ मिलने की संभावना है, क्योंकि उन्हें परियोजनाएं शुरू करने में कम समय और संसाधन खर्च करने पड़ेंगे।
सरकार का उद्देश्य प्रदेश को निवेश के लिए अधिक अनुकूल बनाना और औद्योगिक विकास की गति बढ़ाना है। आसान मंजूरी प्रक्रिया, कम दस्तावेजी बोझ और डिजिटल सिस्टम के जरिए उद्योगों के लिए बेहतर कारोबारी माहौल तैयार करने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
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