हरियाणा सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग को देखते हुए भवन निर्माण नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए प्रावधानों के तहत अब नई इमारतों और निर्माण परियोजनाओं में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन की व्यवस्था को अनिवार्य किया गया है। इस कदम का उद्देश्य राज्य में स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन को प्रोत्साहित करना और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बुनियादी ढांचा तैयार करना है।
नई व्यवस्था के अनुसार, भवन निर्माण करने वाले डेवलपर्स और संस्थानों को परियोजना के प्रारंभिक चरण से ही इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग सुविधाओं की योजना तैयार करनी होगी। इससे आने वाले वर्षों में बढ़ने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त चार्जिंग नेटवर्क उपलब्ध कराया जा सकेगा।
सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए बिजली वितरण कंपनी और अग्निशमन विभाग से आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करनी होंगी। सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों की अनुमति को अनिवार्य बनाया गया है। इससे चार्जिंग सुविधाओं के सुरक्षित संचालन और रखरखाव में मदद मिलेगी।
निर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार ने कुछ विशेष रियायतों की भी व्यवस्था की है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने वाले प्रोजेक्ट्स को फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) से संबंधित लाभ दिए जा सकते हैं। इससे बिल्डर्स और डेवलपर्स को नई नीति अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
इसके अलावा भवनों को ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (OC) प्राप्त करते समय यह जानकारी भी देनी होगी कि परियोजना में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग की व्यवस्था की गई है या नहीं। इससे नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी को सुनिश्चित किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल राज्य में हरित परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इससे प्रदूषण कम करने, ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को सुविधाजनक बनाने में मदद मिलेगी। आने वाले समय में यह नीति शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है।
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