हरियाणा में परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर नई चिंता सामने आई है। विभाग में लंबे समय से विभिन्न कार्यों में सहयोग दे रहे रेडक्रॉस कर्मियों की वापसी के निर्णय के बाद स्टाफ की उपलब्धता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। माना जा रहा है कि इस बदलाव का सीधा असर विभाग द्वारा प्रदान की जाने वाली कई महत्वपूर्ण सेवाओं पर पड़ सकता है।
परिवहन विभाग में बड़ी संख्या में ऐसे कार्य हैं, जिनमें दस्तावेजों की जांच, आवेदन प्रक्रिया, रिकॉर्ड प्रबंधन और नागरिकों को मार्गदर्शन जैसी जिम्मेदारियां शामिल होती हैं। इन कार्यों में सहयोग करने वाले कर्मियों की संख्या कम होने से कामकाज की रफ्तार प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। विभागीय कार्यालयों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग विभिन्न सेवाओं के लिए पहुंचते हैं, ऐसे में मानव संसाधन की कमी चुनौती बन सकती है।
विशेष रूप से ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, परमिट और अन्य परिवहन संबंधी सेवाओं से जुड़े कार्य प्रभावित होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। यदि कर्मचारियों की कमी लंबे समय तक बनी रहती है, तो आवेदनों के निपटान में देरी और कार्यालयों में भीड़ बढ़ने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। इससे आम लोगों को अतिरिक्त इंतजार और असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।
परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के बावजूद कई प्रक्रियाओं में मानव संसाधन की भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। ऐसे में अचानक स्टाफ की संख्या कम होने से प्रशासनिक दबाव बढ़ सकता है। विभाग के सामने चुनौती होगी कि वह उपलब्ध संसाधनों के साथ सेवाओं को सुचारू बनाए रखे।
हालांकि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आवश्यक सेवाओं को प्रभावित होने से बचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार किया जा रहा है। साथ ही कार्यों के पुनर्वितरण और अन्य प्रशासनिक उपायों के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया जाएगा।
फिलहाल नागरिकों और परिवहन सेवाओं से जुड़े लोगों की नजर इस बात पर है कि विभाग आने वाले दिनों में स्टाफ की कमी से निपटने के लिए कौन से कदम उठाता है और सेवाओं की गुणवत्ता को किस तरह बनाए रखता है।
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