हरियाणा शिक्षा विभाग ने शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए राहत भरा निर्णय लेते हुए CPL से संबंधित विवादित आदेश को वापस ले लिया है। विभाग के इस फैसले के बाद कर्मचारियों के बीच संतोष का माहौल है, क्योंकि लंबे समय से इस आदेश को लेकर विभिन्न स्तरों पर आपत्तियां और मांगें उठाई जा रही थीं।
जानकारी के अनुसार पूर्व में जारी आदेश के तहत CPL स्वीकृति प्रक्रिया में अतिरिक्त प्रशासनिक औपचारिकताओं को शामिल किया गया था। कर्मचारियों और कर्मचारी संगठनों का कहना था कि इससे अवकाश प्राप्त करने की प्रक्रिया जटिल हो गई थी और जरूरतमंद कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता था।
शिक्षा विभाग द्वारा आदेश वापस लेने के बाद अब शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों को पहले की तुलना में अधिक सरल प्रक्रिया का लाभ मिल सकेगा। विशेष रूप से वह प्रावधान, जिसमें जिला उपायुक्त (DC) की अनुशंसा को आवश्यक माना जा रहा था, अब लागू नहीं रहेगा। इससे अवकाश स्वीकृति की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
कर्मचारी संगठनों ने विभाग के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे हजारों कर्मचारियों को राहत मिलेगी। उनका मानना है कि अवकाश संबंधी मामलों में अनावश्यक प्रशासनिक बाधाओं को कम करना आवश्यक है, ताकि कर्मचारी अपनी व्यक्तिगत और पारिवारिक जरूरतों के अनुसार सुविधाओं का लाभ उठा सकें।
शिक्षा विभाग के इस कदम को कर्मचारियों के हित में लिया गया महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने से न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ता है, बल्कि विभागीय कार्यप्रणाली भी अधिक प्रभावी बनती है।
फिलहाल विभाग की ओर से नए दिशा-निर्देशों के अनुसार अवकाश स्वीकृति प्रक्रिया को लागू किया जाएगा। इससे प्रदेश के स्कूलों और शिक्षा संस्थानों में कार्यरत शिक्षण तथा गैर-शिक्षण कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है।
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