सफीदों, (एस• के• मित्तल) : नगर के ऐतिहासिक महाराजा अग्रसैन चौक के सामने स्थित गोल चक्कर पर अन्य मूर्ति स्थापित किए जाने के प्रस्ताव को लेकर अग्रवाल समाज का विरोध अब खुलकर सामने आ गया है। इस मुद्दे पर नाराजगी जताते हुए समस्त अग्रवाल समाज ने एकजुट होकर पालिका के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की और निर्माण कार्य को तुरंत रुकवाने की मांग की। अग्रवाल समाज के लोग पहले महाराजा अग्रसैन चौक पर एकत्रित हुए, जहां उन्होंने शांतिपूर्वक विरोध प्रकट करके अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। इसके बाद समाज के प्रतिनिधियों ने एसडीएम पुलकित मल्होत्रा की अनुपस्थिति में तहसीलदार राजेश गर्ग को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराया। ज्ञापन में समाज ने स्पष्ट किया कि पुराने बस स्टैंड स्थित महाराजा अग्रसैन चौक सफीदों का एक ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। यह चौक वर्षों से अग्रवाल समाज की आस्था, सम्मान और पहचान का केंद्र बना हुआ है। समाज के लोगों का कहना है कि यह केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि आपसी सहयोग, समरसता और सेवा जैसे महान आदर्शों का प्रतीक भी है। अग्रवाल समाज ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि नगरपालिका द्वारा चौक के ठीक सामने स्थित गोल चक्कर पर किसी अन्य मूर्ति की स्थापना का कार्य पिछले कुछ दिनों से जारी है, जो पूरी तरह अनुचित है। उनका कहना है कि इस तरह का निर्णय चौक की मूल पहचान और ऐतिहासिक गरिमा को प्रभावित करने वाला है। समाज ने इसे एक ऐसा कदम बताया, जिससे वर्षों से स्थापित सांस्कृतिक महत्व को नुकसान पहुंच सकता है। समाज के प्रतिनिधियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस प्रकार की मूर्ति स्थापना की जाती है, तो इससे अग्रवाल समाज की धार्मिक और सामाजिक भावनाएं आहत होंगी। इससे समाज में असंतोष और रोष का माहौल पैदा हो रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं की, तो समाज को आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और शासन की होगी। अग्रवाल समाज ने अपनी मांगों को स्पष्ट करते हुए कहा कि गोल चक्कर पर चल रहे अन्य मूर्ति स्थापना कार्य को तत्काल प्रभाव से बंद करवाया जाए। इसके साथ ही उन्होंने प्रस्ताव रखा कि उक्त स्थान पर महाराजा अग्रसैन के सिद्धांतों पर आधारित एक रुपया-एक ईंट के प्रतीक चिन्ह का भव्य निर्माण किया जाए। इससे समाज के मूल्यों और योगदान को उचित सम्मान मिलेगा और नई पीढ़ी को भी प्रेरणा प्राप्त होगी।
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