हरियाणा में मंत्री के ऑर्डर पर भी लेडी SHO-ASI सस्पेंड नहीं: पुलिस बोली- पहले जांच करेंगे; पीड़िता बोली- ‘देख लो मेरी कितनी सुनते होंगे’

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हरियाणा में पुलिस कार्रवाई को लेकर मंत्री के आदेश और विभागीय प्रक्रिया के बीच टकराव का मामला सामने आया है। एक महिला की शिकायत पर मंत्री ने संबंधित लेडी SHO और ASI को सस्पेंड करने के आदेश दिए, लेकिन इसके बावजूद दोनों पुलिसकर्मियों पर तत्काल निलंबन की कार्रवाई नहीं हुई।

मंत्री के निर्देश के बाद पुलिस की ओर से कहा गया कि मामले में पहले जांच की जाएगी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, शिकायत और पूरे घटनाक्रम की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इससे मंत्री के आदेश के बावजूद तत्काल सस्पेंशन नहीं होने को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

मामले में पीड़िता ने भी पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई। कार्रवाई में देरी को लेकर उसने तंज कसते हुए कहा कि ‘देख लो मेरी कितनी सुनते होंगे।’ पीड़िता के इस बयान के बाद मामला और चर्चा में आ गया।

पीड़िता का आरोप है कि उसने अपनी शिकायत को लेकर अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद मामला मंत्री के संज्ञान में पहुंचा। मंत्री ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए SHO और ASI को सस्पेंड करने के निर्देश दिए। हालांकि, पुलिस की ओर से तत्काल निलंबन के बजाय जांच की बात कही गई।

अब इस पूरे मामले में मंत्री ने DC से जवाब लेने की बात कही है। इससे साफ है कि मंत्री के निर्देश के बावजूद पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की कोशिश की जा रही है।

मामले में पुलिस का कहना है कि किसी भी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई से पहले तथ्यों की जांच जरूरी है। जांच में शिकायत, संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका और पूरे घटनाक्रम से जुड़े दस्तावेजों को देखा जा सकता है। इसके बाद विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, पीड़िता के लिए यह मामला पुलिस व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़ा हुआ है। मंत्री के निर्देश के बाद भी तत्काल कार्रवाई नहीं होने से उसे अपनी शिकायत पर सुनवाई को लेकर सवाल उठाने का मौका मिला है।

अब DC से मांगे जाने वाले जवाब और पुलिस जांच की रिपोर्ट पर सभी की नजर है। जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि SHO और ASI की भूमिका क्या रही और उनके खिलाफ निलंबन समेत कोई विभागीय कार्रवाई होती है या नहीं।

फिलहाल मामला पुलिस विभाग और प्रशासन के बीच जवाबदेही का मुद्दा बन गया है। मंत्री के निर्देश के बावजूद कार्रवाई न होने के कारण पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

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