कुरुक्षेत्र : जिले के पिहोवा की अनाज मंडी में किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर गुरुवार को राज्य स्तरीय किसान महापंचायत शुरू हुई। इसमें हरियाणा के अलग-अलग हिस्सों से किसान प्रतिनिधियों के साथ करीब 10 किसान संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए हैं। महापंचायत में धान की सरकारी खरीद, नमी की सीमा, गन्ने और दूध के दाम तथा सभी फसलों पर MSP की कानूनी गारंटी समेत विभिन्न मुद्दों पर आगे की रणनीति तैयार की जा रही है।
किसान संगठनों की प्रमुख मांग धान की सरकारी खरीद 15 सितंबर से शुरू करने की है। संगठनों का कहना है कि मंडियों में धान की आवक शुरू होने की स्थिति को देखते हुए खरीद प्रक्रिया जल्द शुरू की जानी चाहिए, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी न हो।
इसी मांग को लेकर किसान संगठनों ने पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को मांगपत्र भी सौंपा था। किसान नेताओं ने चेतावनी दी थी कि यदि 15 सितंबर से सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई तो आंदोलन को तेज करने पर विचार किया जाएगा।
किसान संगठनों ने मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में GT रोड और विभिन्न जिलों में DC कार्यालयों के बाहर धान डालकर विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी भी दी है। हालांकि आंदोलन के अगले चरण को लेकर अंतिम रणनीति महापंचायत में विचार-विमर्श के बाद तय की जाएगी।
भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के प्रधान संजू नंबरदार के मुताबिक महापंचायत में किसानों से जुड़े सभी प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। धान की सरकारी खरीद की तारीख के साथ खरीद के दौरान स्वीकार्य नमी की सीमा भी प्रमुख मुद्दा है।
किसान संगठन धान खरीद के लिए नमी की मौजूदा 17 प्रतिशत सीमा को बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने की मांग कर रहे हैं। किसान नेताओं का कहना है कि मौसम और फसल की स्थिति को देखते हुए नमी के मानक में राहत मिलने से किसानों को अपनी उपज बेचने में सुविधा होगी।
धान के अलावा गन्ने के भाव का मुद्दा भी महापंचायत में उठाया जा रहा है। किसान संगठनों का कहना है कि चीनी की कीमतों में बदलाव का लाभ गन्ना उत्पादकों तक भी पहुंचना चाहिए। इसके लिए गन्ने का उचित खरीद मूल्य बढ़ाने की मांग सरकार के सामने रखने की तैयारी है।
दूध के दाम को लेकर भी किसान प्रतिनिधि चर्चा कर रहे हैं। पशुपालन से जुड़े किसानों की लागत और उन्हें मिलने वाले दाम के बीच संतुलन बनाने के लिए दूध का बेहतर मूल्य सुनिश्चित करने की मांग उठाई जा रही है।
महापंचायत का एक अन्य प्रमुख मुद्दा सभी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी है। किसान संगठन लंबे समय से MSP को कानूनी अधिकार का रूप देने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि किसानों को उनकी उपज का तय और लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
पिहोवा की महापंचायत में शामिल किसान संगठन इन सभी मांगों पर साझा रणनीति बनाने का प्रयास कर रहे हैं। बैठक के बाद आंदोलन के अगले चरण और सरकार के सामने रखी जाने वाली मांगों को लेकर निर्णय लिया जा सकता है।
फिलहाल किसान संगठनों की निगाह 15 सितंबर से धान की सरकारी खरीद शुरू कराने पर है। यदि उनकी मांग पर सरकार की ओर से सकारात्मक फैसला नहीं आता है तो किसान संगठनों ने प्रदेश स्तर पर विरोध प्रदर्शन तेज करने की चेतावनी दी है।
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